रांची: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर झारखंड कांग्रेस ने सोमवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने धुर्वा सेक्टर-2 स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय का घेराव किया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर जमकर विरोध जताया। इस दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी फूंका।
पुराना विधानसभा परिसर से निकला जुलूस, CEO कार्यालय तक मार्च
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा परिसर से धुर्वा स्थित CEO कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्लेकार्ड लेकर “CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” और “शेम ऑन ज्ञानेश कुमार” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारों के साथ निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर विरोध जताया। CEO कार्यालय के गेट पर कुछ कार्यकर्ताओं ने गेट खोलकर अंदर जाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
‘भाजपा का एजेंट’ बताकर साधा निशाना
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार भाजपा के “एजेंट” के रूप में काम कर रहे हैं और लोकतंत्र की गरिमा को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और वोट चोरी करने का काम कर रहे हैं।” कमलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा को “अनुचित” लाभ दिया।
कांग्रेस विधानसभा दल के नेता प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि CEC ने अपनी शक्ति से अधिक काम किया और मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के नए तरीके अपनाए। उन्होंने कहा, “नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 प्रक्रिया को जटिल बना दिया गया है, जिससे नए मतदाता पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।”
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार को राष्ट्रपति के नाम लिखा ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी का कहना है कि ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है।
प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शन
रांची के अलावा धनबाद, गढ़वा, जामताड़ा, पाकुड़, दुमका समेत राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्वच्छता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में नामों को लेकर सामने आ रहे सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
देशव्यापी प्रदर्शन का हिस्सा है झारखंड का विरोध
झारखंड का यह प्रदर्शन कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। सोमवार को महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किए। आगरा में प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के आवास के बाहर “गद्दार ज्ञानेश” लिखकर विरोध जताया।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों में है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए। इन आपत्तियों में फॉर्म-6 में संशोधन, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता सूची डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।
चुनाव आयोग का रुख
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची के SIR से जुड़े सभी अहम फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि एक बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और उसके सभी आदेश पूर्ण कानूनी मंजूरी के साथ जारी किए गए हैं।
फिलहाल, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी बता रहा है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

