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झारखंड कैडर के 26 आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात, कई अफसर वर्षों से राज्य से बाहर

रांची: झारखंड कैडर के बड़ी संख्या में आईपीएस अधिकारी इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर देश की विभिन्न सुरक्षा, जांच और खुफिया एजेंसियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उपलब्ध सूची के मुताबिक, झारखंड कैडर के 26 आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और संगठनों में डीजी से लेकर एसपी स्तर तक के पदों पर तैनात हैं। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी ऐसे हैं, जो वर्षों से राज्य से बाहर केंद्रीय सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

झारखंड पुलिस की 2026 सिविल लिस्ट के अनुसार, इन अधिकारियों में कुछ की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अवधि काफी लंबी है। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी बलजीत सिंह फरवरी 2010 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और इस लिहाज से वह सबसे लंबे समय से केंद्र में तैनात अधिकारियों में शामिल हैं। वहीं 1994 बैच की संपत मीणा सितंबर 2017 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। आशीष बत्रा सितंबर 2019 से, कुलदीप द्विवेदी जनवरी 2021 से और नवीन कुमार सिंह मई 2021 से केंद्र में सेवाएं दे रहे हैं।

इसी तरह प्रियंका मीणा जून 2022 से, आर. रामकुमार नवंबर 2023 से और प्रांजल रुंडला जून 2024 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इन अधिकारियों की लंबी अवधि की तैनाती से पता चलता है कि झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से राज्य पुलिस की नियमित व्यवस्था से बाहर रहकर केंद्रीय जिम्मेदारियां संभाल रहा है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात झारखंड कैडर के अधिकारियों की सूची में डीजी स्तर पर संपत मीणा, एडीजी स्तर पर संजय ए. लाठकर, नवीन कुमार सिंह, बलजीत सिंह और आशीष बत्रा शामिल हैं। आईजी स्तर पर साकेत कुमार सिंह, अमोल वेणुकांत होमकर, कुलदीप द्विवेदी, अभिषेक, ए. विजयालक्ष्मी और अनूप टी. मैथ्यू की तैनाती है। डीआईजी स्तर पर डॉ. तमिल वानन, अनीश गुप्ता, पी. मुरुगन, सुरेंद्र कुमार झा, शिवानी तिवारी, चंदन कुमार झा और जया रॉय शामिल हैं। वहीं एसपी स्तर पर अखिलेश बी. वॉरियर, अंशुमन कुमार, प्रियंका मीणा, प्रांजल रुंडला, आर. रामकुमार, विनीत कुमार, के. विजय शंकर और शुभांशु जैन केंद्रीय संस्थानों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण सुरक्षा और जांच एजेंसियों में भी झारखंड कैडर के इन अधिकारियों की मौजूदगी दिखाई देती है। संपत मीणा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में विशेष निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। संजय आनंदराव लाठकर परमाणु ऊर्जा विभाग में एडीजी सुरक्षा हैं। नवीन कुमार सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से जुड़े दायित्व में हैं, जबकि बलजीत सिंह इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात हैं।

आशीष बत्रा एनआईए में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बाद फिलहाल विशेष अध्ययन पर हैं। साकेत कुमार सिंह सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर में आईजी हैं, जबकि अमोल वेणुकांत होमकर सीआरपीएफ के जम्मू सेक्टर में आईजी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सीबीआई में कुलदीप द्विवेदी और अनूप टी. मैथ्यू संयुक्त निदेशक हैं। अनीश गुप्ता भी सीबीआई में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। अभिषेक इंटेलिजेंस ब्यूरो में एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर हैं, जबकि ए. विजयालक्ष्मी ने इस वर्ष सीआरपीएफ दिल्ली में योगदान दिया है।

अन्य अधिकारियों की बात करें तो डॉ. एम. तमिल वानन सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में संयुक्त निदेशक हैं। पी. मुरुगन सीबीआई में तैनात हैं। सुरेंद्र कुमार झा बीएसएफ में डीआईजी हैं, जबकि शिवानी तिवारी सीबीआई लखनऊ में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। चंदन कुमार झा आईटीबीपी में डीआईजी हैं और जया रॉय एनआईए में तैनात हैं।

एसपी स्तर के अधिकारियों में अखिलेश बी. वॉरियर एनटीआरओ, अंशुमन कुमार इंटेलिजेंस ब्यूरो, प्रियंका मीणा एनसीआरबी और आर. रामकुमार सीबीआई में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। विनीत कुमार आईबी दिल्ली में सहायक निदेशक हैं। के. विजय शंकर कैबिनेट सचिवालय और शुभांशु जैन इंटेलिजेंस ब्यूरो में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

इधर, झारखंड कैडर के कुछ और आईपीएस अधिकारियों के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की तैयारी की चर्चा है। इनमें जमशेदपुर के पूर्व एसएसपी पीयूष पांडेय और उनकी पत्नी निधि द्विवेदी के नाम प्रमुख हैं। दोनों ने केंद्र सरकार के अधीन प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है। पीयूष पांडेय 2014 बैच और निधि द्विवेदी 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। फिलहाल झारखंड पुलिस की 2026 सिविल लिस्ट में दोनों की तैनाती पुलिस मुख्यालय में दर्ज है।

इसके अलावा एटीएस के एसपी रह चुके ऋषभ झा का नाम भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की दौड़ में बताया जा रहा है। यदि राज्य सरकार की अनुमति मिलती है, तो इन अधिकारियों के लिए केंद्र की सुरक्षा, जांच और खुफिया एजेंसियों में तैनाती का रास्ता साफ हो सकता है। इस तरह आने वाले समय में केंद्रीय संस्थानों में झारखंड कैडर के आईपीएस अधिकारियों की संख्या और बढ़ सकती है।

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