देहरादून: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक से रेस्क्यू किए गए करीब पांच साल के वयस्क बाघ का भविष्य अब DNA जांच की रिपोर्ट से तय होगा। फिलहाल बाघ को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि रेस्क्यू किया गया बाघ वही है या नहीं, जिस पर 21 वर्षीय शालू नेगी की मौत के मामले में हमला करने का संदेह है।
दरअसल, पिछले महीने अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में बाघ के हमले में शालू नेगी की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश था। लोगों के दबाव के बाद वन विभाग ने संदिग्ध बाघ को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। इसके लिए अल्मोड़ा वन प्रभाग के अलावा दूसरे वन प्रभागों के विशेषज्ञों और कर्मचारियों को भी अभियान में शामिल किया गया। जंगल में कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाने के साथ कैमरा ट्रैप और अन्य माध्यमों से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
लगातार निगरानी और तलाशी अभियान के बाद वन विभाग की टीम एक वयस्क बाघ को रेस्क्यू करने में सफल रही। करीब पांच वर्ष के इस बाघ को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया, जहां फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है।
अब इस मामले में DNA जांच सबसे अहम कड़ी बन गई है। शालू नेगी के शव से बाघ की पहचान से संबंधित सैंपल जुटाए गए थे। इन सैंपलों और रेस्क्यू किए गए बाघ के DNA का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि पकड़ा गया बाघ ही शालू नेगी पर हमला करने वाला था या जंगल में मौजूद किसी दूसरे बाघ को रेस्क्यू कर लिया गया है।
अगर DNA रिपोर्ट में दोनों सैंपल मैच करते हैं, तो रेस्क्यू किए गए बाघ को इंसानों पर हमला करने वाला बाघ माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसे दोबारा जंगल में छोड़ने के बजाय रेस्क्यू सेंटर में रखने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल की ओर से लिया जाएगा।
वन विभाग जांच को केवल शालू नेगी की मौत तक सीमित नहीं रखना चाहता। क्षेत्र में इससे पहले बाघ के हमलों में मारे गए लोगों से जुटाए गए सैंपलों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है। इन सैंपलों के साथ रेस्क्यू किए गए बाघ के DNA का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या यही बाघ पहले हुए अन्य हमलों में भी शामिल रहा है।
इस मामले में यह संभावना भी महत्वपूर्ण है कि जिस बाघ को वन विभाग ने पकड़ा है, वह शालू नेगी पर हमला करने वाला बाघ न हो। अगर इलाके में एक से ज्यादा बाघ सक्रिय हैं, तो सर्च ऑपरेशन के दौरान किसी दूसरे बाघ के पकड़े जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि DNA रिपोर्ट को इस पूरे मामले में निर्णायक माना जा रहा है।
अगर DNA सैंपल मैच नहीं करते हैं, तो रेस्क्यू किए गए बाघ को उपयुक्त परिस्थितियों में वापस जंगल में छोड़ने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, DNA मैच होने के साथ अगर जांच में यह भी सामने आता है कि बाघ पहले भी इंसानों पर हमलों में शामिल रहा है, तो उसे जंगल में वापस छोड़ना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसे रेस्क्यू सेंटर में ही रखने का फैसला लिया जा सकता है।
नैनीताल वन प्रभाग के रेस्क्यू विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु पांगती के अनुसार, बाघ को रेस्क्यू कर ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है और अब DNA जांच के नतीजे का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। फिलहाल करीब पांच साल के इस बाघ का भविष्य DNA जांच पर टिका है और रिपोर्ट ही यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि उसे जंगल में आजादी मिलेगी या रेस्क्यू सेंटर में ही रखा जाएगा।


