नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को छात्रों से संवाद करते हुए अपने 2013 के चर्चित भाषण को याद किया। उन्होंने कहा कि उस संबोधन के 13-14 साल बाद भी उसकी चर्चा होती है और नई पीढ़ी भी उस भाषण को सुन और देख रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 में उनके भाषण से जो लहर बनी थी, उसका प्रभाव आज भी दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने संबोधन का जिक्र करते हुए उस समय देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति की तुलना मौजूदा हालात से की। उन्होंने कहा कि 2013 में देश महंगाई, आर्थिक सुस्ती, भ्रष्टाचार और नीतिगत गतिरोध जैसी चुनौतियों से गुजर रहा था। उस दौर में महंगाई करीब 10 प्रतिशत थी और औद्योगिक गतिविधियों में भी सुस्ती थी। विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम किया था और देश को दुनिया के ‘Fragile Five’ देशों में शामिल किया जा रहा था।
पीएम मोदी ने कहा कि उस समय भ्रष्टाचार और घोटालों की खबरें लगातार सामने आती थीं। हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप, हैदराबाद में बम धमाके और सीमा पर भारतीय सैनिकों की मौत जैसी घटनाएं भी चर्चा में थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में देश में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा होती थी और बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी।
प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि 2013 में उन्होंने इसी मंच से देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपनी बात रखी थी और अब वह उसी मंच पर अपने काम का रिपोर्ट कार्ड लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने ‘Made in India’ का विचार सामने रखा था, जिसे कई लोग मुश्किल या असंभव मानते थे। आज भारतीय उत्पादों और भारत में बने सामान की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने हाल में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके इस बयान के बाद ऐसे लोगों की पहचान सामने आने लगी, जो उनकी नजर में देश को नुकसान पहुंचाने वाली सोच को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब ऐसे लोगों का वास्तविक चेहरा देख रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके बयानों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वह ‘माई-बाप’ संस्कृति के समर्थकों के सामने मजबूती से खड़े हैं और उन्हें अपने काम का हिसाब देने में कोई झिझक नहीं है। उन्होंने कहा कि सच के सामने झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता।
पीएम मोदी ने SRCC में 2013 के अपने भाषण के दौरान दिए गए P2G2 मंत्र को भी याद किया। उन्होंने बताया कि इसका मतलब ‘Pro-People Good Governance’ यानी जन-केंद्रित सुशासन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक देश में ऐसी व्यवस्था रही, जिसमें समस्या आने के बाद समाधान तलाशने की प्रवृत्ति थी। उन्होंने कहा कि 2013 में उन्होंने इस सोच में बदलाव की जरूरत बताई थी और 2014 के बाद उनकी सरकार ने जन-केंद्रित शासन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का काम किया गया। उन्होंने दावा किया कि उस समय गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के प्रयासों का भी कुछ लोगों ने विरोध किया था। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने ‘माई-बाप’ संस्कृति को खत्म कर लोगों को सीधे सरकारी योजनाओं और आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत को कई वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। महामारी, युद्ध, वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव जैसे हालात के बावजूद भारत ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। उन्होंने कहा कि हर संकट के दौरान कुछ लोगों को लगता था कि भारत मुश्किल में फंस जाएगा, लेकिन जनता के समर्थन ने ऐसी आशंकाओं को गलत साबित किया।
SRCC के पूर्व छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉलेज के alumni ‘OG’ हैं और उन्होंने देश-दुनिया में संस्थान का नाम रोशन किया है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को भी याद किया, जो SRCC के छात्र रहे थे। पीएम मोदी ने कहा कि इस संस्थान की पहचान केवल अर्थव्यवस्था और कारोबार तक सीमित नहीं है। यहां से कला, राजनीति, कानून और न्यायपालिका समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले लोग भी निकले हैं।
SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन उनके 2013 के भाषण और पिछले वर्षों में देश में आए बदलावों के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने छात्रों के सामने उस समय की चुनौतियों और वर्तमान भारत की स्थिति की तुलना करते हुए ‘Made in India’, सुशासन, वित्तीय समावेशन और वैश्विक संकटों से निपटने जैसे मुद्दों को सामने रखा। साथ ही उन्होंने युवाओं को भारत की आगे की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का संदेश दिया।

