पटना: जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में बिहार पुलिस ने कार्रवाई की है। पटना के सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में तैनात एक स्टेनोग्राफर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि कर्मचारी ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट की थी। पोस्ट कुछ ही देर बाद हटा दी गई थी।
पीड़िता की पहचान उजागर होने की शिकायत के बाद कार्रवाई
पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया कि सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा होने से नाबालिग पीड़िता की निजता और पहचान प्रभावित होने की स्थिति बनी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और CMO के स्टेनोग्राफर के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस के मुताबिक, तस्वीर को आगे शेयर करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
POCSO समेत इन कानूनों के तहत केस
रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ POCSO Act की धारा 23 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं का उल्लेख किया गया है। पुलिस शिकायत में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने की आशंका को आधार बनाया गया है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सामने आया था मामला
यह मामला उस समय सामने आया जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई की पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा की गई। बाद में पोस्ट को हटा दिया गया। तस्वीर को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए और नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने का आरोप लगाया।
पुलिस जांच में शिकायत को भी शामिल किया गया
पटना SSP के मुताबिक, इस मामले में दर्ज FIR की जांच के दौरान अन्य शिकायतों को भी शामिल किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सांसद मीसा भारती की ओर से दी गई शिकायत को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस ने कहा है कि मामले में तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

