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गया में पितृ पक्ष का धार्मिक अनुष्ठान, फल्गु तट पर श्राद्ध और तर्पण; जानें भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यता

गया: बिहार के गया में पितृ पक्ष के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। गया में पितरों की शांति के लिए फल्गु नदी के तट और विभिन्न वेदियों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया में पिंडदान का संबंध भगवान विष्णु और गयासुर से जुड़ी पौराणिक कथा से है।

फल्गु नदी के तट पर होता है श्राद्ध-तर्पण

गया श्राद्ध की परंपरा में फल्गु नदी का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु फल्गु में स्नान करने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। इसके बाद गया की अलग-अलग वेदियों पर पिंडदान की परंपरा है।

2026 के गया पितृपक्ष कार्यक्रम के अनुसार, 26 सितंबर को भाद्र पूर्णिमा के अवसर पर फल्गु स्नान, श्राद्ध और गयापाल तीर्थपुरोहित की पांवपूजा का विधान है। इसके बाद 27 सितंबर से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ नियमित पितृपक्ष कर्मकांड शुरू होता है।

भगवान विष्णु से जुड़ी है गया की मान्यता

गया को पिंडदान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है। यहां स्थित विष्णुपद मंदिर और भगवान विष्णु के चरणचिह्नों से जुड़ी मान्यताओं के कारण इस स्थान का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितृ ऋण से मुक्ति की कामना के साथ यहां श्राद्ध कर्म करते हैं।

अलग-अलग तिथियों पर अलग वेदियों का विधान

गया में पितृपक्ष के दौरान हर तिथि के लिए अलग-अलग धार्मिक कर्मकांड निर्धारित हैं। 27 सितंबर को प्रतिपदा के दिन ब्रह्मकुंड, प्रेतशिला, रामशिला और रामकुंड में श्राद्ध-पिंडदान का विधान है। 28 सितंबर को पंचतीर्थ और अन्य वेदियों पर श्राद्ध कर्म होंगे।

10 अक्टूबर को होगा खीर से पिंडदान

गया के पितृपक्ष कार्यक्रम में 10 अक्टूबर 2026 यानी सर्वपितृ अमावस्या के दिन अक्षयवट श्राद्ध, खीर से पिंडदान, शैय्यादान, सुफल और पितृ विसर्जन का विधान बताया गया है। यानी खीर से पिंडदान को पितृपक्ष की अंतिम प्रमुख तिथि से जोड़कर देखा जाता है।

देशभर से गया पहुंचते हैं श्रद्धालु

पितृपक्ष के दौरान गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने पहुंचते हैं। फल्गु नदी के घाट, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडवेदियों पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। गया में पितरों के निमित्त किए जाने वाले इन कर्मकांडों की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

2026 में पितृपक्ष की तिथियां 26 सितंबर के पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगी। 11 अक्टूबर को पितृ विदाई से जुड़े कर्मकांड का उल्लेख गया के कार्यक्रम में किया गया है।

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