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रूपी सोरेन के निधन पर भावुक हुए रघुवर दास, बताया दिलचस्प किस्सा; बोले- मां की तरह देती थीं स्नेह

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन से झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर है। 7 अक्टूबर 2026 की शाम रांची के एक निजी अस्पताल में 80 वर्ष की उम्र में रूपी सोरेन का निधन हुआ। उनके निधन पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया। इसी कड़ी में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रूपी सोरेन से जुड़ी अपनी पुरानी याद साझा करते हुए उन्हें मां के समान बताया।

रघुवर दास ने कहा कि रूपी सोरेन का जाना उनके लिए केवल एक राजनीतिक परिवार से जुड़ी शोक की खबर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने कहा कि रूपी सोरेन उन्हें पुत्र जैसा स्नेह देती थीं और उनके साथ बिताए पल हमेशा उनकी स्मृतियों में रहेंगे।

रघुवर दास ने सुनाया पुराना किस्सा

रूपी सोरेन के निधन के बाद रघुवर दास ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस झारखंड लौटे थे, तब वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन से मिलने उनके आवास पहुंचे थे।

इसी मुलाकात के दौरान बातचीत में ओडिशा विधानसभा चुनाव का भी जिक्र हुआ। रघुवर दास के मुताबिक, उस चुनाव में मयूरभंज क्षेत्र से शिबू सोरेन के परिवार की एक सदस्य चुनाव मैदान में थीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

रघुवर दास ने बताया कि रूपी सोरेन ने उनसे मजाकिया अंदाज में कहा था—“तुमने मेरी बेटी को हरा दिया।”

इस पर रघुवर दास ने जवाब दिया कि वह उस समय राज्यपाल थे और चुनाव लड़ना या जिताना पार्टी का राजनीतिक मामला था। यह बातचीत दोनों परिवारों के बीच मौजूद आत्मीय संबंधों की झलक देती है।

ठंड में शिबू सोरेन के साथ बैठकर आग तापते थे रघुवर दास

रघुवर दास ने रूपी सोरेन से जुड़ी एक और पुरानी याद साझा की। उन्होंने बताया कि जब शिबू सोरेन मुख्यमंत्री थे और वह खुद उनके डिप्टी सीएम हुआ करते थे, तब गुरुजी अक्सर उन्हें ठंड के मौसम में अपने आवास पर बुलाते थे।

ऐसे मौकों पर रघुवर दास शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के साथ बैठकर आग तापते और बातचीत करते थे।

रघुवर दास के मुताबिक, रूपी सोरेन उनके लिए केवल शिबू सोरेन की पत्नी या हेमंत सोरेन की मां नहीं थीं, बल्कि उनका व्यवहार उनके प्रति मां जैसा था। उन्होंने रूपी सोरेन को ममता और स्नेह का स्वरूप बताया।

राजनीति में अलग-अलग पक्ष, लेकिन रिश्तों में आत्मीयता

रघुवर दास और सोरेन परिवार झारखंड की राजनीति में अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों से जुड़े रहे हैं। रघुवर दास भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं, जबकि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं।

इसके बावजूद रूपी सोरेन के निधन पर रघुवर दास की प्रतिक्रिया में राजनीतिक मतभेदों के बजाय व्यक्तिगत संबंधों और आत्मीयता की झलक दिखाई दी।

जनवरी 2025 में भी रघुवर दास शिबू सोरेन के जन्मदिन पर उनके आवास पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने शिबू सोरेन से मुलाकात की और रूपी सोरेन से भी आशीर्वाद लिया था। उस मुलाकात की तस्वीरों और विवरणों में दोनों के बीच आत्मीयता दिखाई दी थी।

रूपी सोरेन को बताया था परिवार की मजबूत कड़ी

रूपी सोरेन का जीवन लंबे समय तक झारखंड आंदोलन और शिबू सोरेन के राजनीतिक संघर्ष की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा। जब शिबू सोरेन आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियों के कारण लंबे समय तक घर से दूर रहते थे, तब रूपी सोरेन ने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश के साथ परिवार को मुश्किल दौर में संभाले रखा। शिबू सोरेन के संघर्ष के दौरान घर-परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा रूपी सोरेन के कंधों पर रहा।

1999 में दुमका से लड़ा था लोकसभा चुनाव

रूपी सोरेन खुद भी चुनावी राजनीति में उतरी थीं। वर्ष 1999 में उन्होंने दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी से हुआ था और वह बेहद करीबी मुकाबले में हार गई थीं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हार का अंतर 5 हजार से भी कम वोटों का था।

इसके बाद उनका सार्वजनिक राजनीतिक जीवन अपेक्षाकृत सीमित रहा और वह मुख्य रूप से परिवार के साथ जुड़ी रहीं।

पति शिबू सोरेन के निधन के बाद एक साल में रूपी भी चली गईं

रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार ने करीब एक साल के भीतर दूसरी बड़ी व्यक्तिगत क्षति झेली है। उनके पति और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन का अगस्त 2025 में निधन हुआ था।

रूपी सोरेन भी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। उन्हें 18 सितंबर 2026 को सांस लेने में परेशानी के बाद रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और 7 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे उनका निधन हो गया।

हेमंत सोरेन ने कहा- मां मेरा सबसे बड़ा सहारा थीं

मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भावुक संदेश में उन्हें अपना सबसे बड़ा सहारा बताया। उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद मां ही उनका सबसे बड़ा आश्रय थीं और अब वह भी प्रकृति की गोद में विलीन हो गईं।

रूपी सोरेन के निधन पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया।

 

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