रांची: झारखंड की राजधानी रांची के तमाड़ प्रखंड क्षेत्र से सामने आई एक संवेदनशील खबर में माता-पिता को खो चुके दो छोटे बच्चों की मदद के लिए जिला प्रशासन आगे आया है। तमाड़ थाना क्षेत्र की कुंदला पंचायत के लेंकेया गांव में माता-पिता की असामयिक मृत्यु के बाद बेसहारा हुए दोनों बच्चों की स्थिति की जानकारी मिलने पर प्रशासन ने तत्काल सहायता उपलब्ध कराई।
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर बच्चों की स्थिति की जानकारी ली। बच्चों को तत्काल कपड़े, कंबल और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया। साथ ही उनके भविष्य और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें गुरुकुल विद्यालय में दाखिला दिलाया गया है।
बीमारी के बाद मां की मौत, चार दिन बाद पिता ने भी तोड़ा दम
जानकारी के मुताबिक, लेंकेया गांव निवासी योगेंद्र मुंडा और उनकी पत्नी सावित्री देवी की असामयिक मृत्यु के बाद उनके दो बच्चे बेसहारा हो गए। रिपोर्ट के अनुसार मां सावित्री देवी की बीमारी के कारण मृत्यु हुई थी। इसके महज चार दिन बाद पिता योगेंद्र मुंडा का भी निधन हो गया।
माता-पिता के चले जाने के बाद दोनों बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी देखभाल, पढ़ाई और सुरक्षित भविष्य की थी। दोनों बच्चों की उम्र करीब आठ और तीन वर्ष बताई गई है। माता-पिता के निधन के बाद दूर के रिश्ते में चाचा करीब एक महीने से दोनों बच्चों की देखभाल कर रहे थे।
प्रशासन को जानकारी मिली तो गांव पहुंची टीम
बच्चों की स्थिति की जानकारी बुंडू अनुमंडल प्रशासन को मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। उपायुक्त के निर्देश पर बुंडू के अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम लेंकेया गांव पहुंची।
टीम में तमाड़ के प्रखंड विकास पदाधिकारी, कल्याण पदाधिकारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार से जुड़े पैरा-लीगल वॉलंटियर्स भी शामिल थे। टीम ने बच्चों की स्थिति और उनकी देखभाल को लेकर स्थानीय लोगों तथा पंचायत प्रतिनिधियों से भी जानकारी ली।
राशन, कंबल और जरूरी सामान उपलब्ध कराया
जिला प्रशासन की ओर से बच्चों के परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसमें राशन, कंबल, कपड़े और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
प्रशासन का प्रयास है कि माता-पिता के निधन के बाद बच्चों को बुनियादी जरूरतों के लिए किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। यह सहायता तत्काल राहत के साथ-साथ बच्चों के संरक्षण की दिशा में उठाया गया कदम है।
गुरुकुल विद्यालय में हुआ दाखिला
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने दोनों का दाखिला स्थानीय गुरुकुल विद्यालय में कराया है।
विद्यालय में बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, ड्रेस और छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित वातावरण में रहने और देखभाल की सुविधा भी मिल सकेगी।
विद्यालय प्रबंधन ने भी बच्चों की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय के प्रधानाचार्य ने दोनों बच्चों की पढ़ाई, रहने और उनकी आवश्यक जरूरतों का ध्यान रखने की बात कही है।
बाल संरक्षण विभाग की योजना से जोड़ा जाएगा
प्रशासन ने बच्चों को केवल तत्काल सहायता देने तक ही मामला सीमित नहीं रखा है। दोनों बच्चों को बाल संरक्षण विभाग की Sponsorship योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इसका उद्देश्य बच्चों को आगे भी जरूरत के मुताबिक संरक्षण और सरकारी सहायता उपलब्ध कराना है। इससे उनकी शिक्षा, देखभाल और भविष्य की जरूरतों के लिए संस्थागत सहयोग मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन की पहल से बच्चों के भविष्य को मिलेगी दिशा
माता-पिता दोनों को कम उम्र में खोने के बाद बच्चों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य का था। ऐसे में प्रशासन की ओर से शिक्षा, रहने और बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रांची जिला प्रशासन के पास सामाजिक सुरक्षा और नागरिक सेवाओं से जुड़े कई तंत्र मौजूद हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के साथ चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भी उपलब्ध है।
सिर्फ राहत नहीं, सुरक्षित भविष्य की कोशिश
इस मामले में प्रशासन की पहल की खास बात यह है कि बच्चों को केवल राशन और जरूरी सामान उपलब्ध कराने के बजाय उनकी शिक्षा और दीर्घकालिक संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है।
गुरुकुल में दाखिला, छात्रावास और मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था तथा बाल संरक्षण विभाग की Sponsorship योजना से जोड़ने की प्रक्रिया से बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

