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जेपीएससी गड़बड़ी मामले में हजारीबाग कनेक्शन: डॉ. जमाल अहमद की अहम भूमिका पर टिकी सीआईडी की नजर, श्वेता गुप्ता और रामबीर के खुलासों से खुले राज

-हजारीबाग के अभ्यर्थियों और चयन प्रक्रिया में डॉ. जमाल अहमद की थी गहरी पकड़
उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी में हुए बहुचर्चित गड़बड़ी को लेकर चल रही सीआईडी की जांच में हजारीबाग का कनेक्शन और जेपीएससी के सदस्य डॉ. जमाल अहमद की भूमिका अब इस पूरी घटना के केंद्र में आ गई है। टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह ने सीआईडी की पूछताछ के दौरान यह बड़ा खुलासा किया है कि हजारीबाग क्षेत्र के अभ्यर्थियों के चयन और उनकी सूचियों को प्रभावित करने में डॉ. जमाल अहमद की काफी मजबूत पकड़ हुआ करती थी। हालांकि, आयोग के भीतर आधुनिक कोडिंग प्रणाली पूरी तरह से लागू हो जाने के कारण कई ऐसे अभ्यर्थी थे, जिनकी पैरवी के बावजूद उनका चयन इस नई और पारदर्शी व्यवस्था के तहत नहीं हो पाया था।
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परिणाम पर हस्ताक्षर से इनकार और आयोग के भीतर छिड़ा अंदरूनी घमासान
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डॉ. जमाल अहमद और जेपीएससी में लंबे समय तक परीक्षा के पदों पर पदस्थापित रही श्वेता गुप्ता के बीच के संबंध कभी भी सामान्य नहीं रहे, बल्कि वे उनसे हमेशा नाराज रहते थे। इस नाराजगी और असंतोष का सबसे बड़ा प्रभाव आयोग के परिणामों पर पड़ता था, क्योंकि डॉ. जमाल अहमद कई बार जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं के फाइनल रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर देते थे। असली विवाद और प्रशासनिक खींचतान तब परवान चढ़ी जब श्वेता कुमारी गुप्ता का ट्रांसफर होने के बावजूद उन्हें आयोग के भीतर ही काम करने के लिए रोक लिया गया। इस बात से जेपीएससी के सदस्य, विशेषकर डॉ. जमाल अहमद बेहद खफा थे कि ट्रांसफर के बाद भी श्वेता आयोग में कैसे सक्रिय हैं, और इसी विरोध के चलते वे अक्सर फाइलों और रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से कतराते रहे।
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रामबीर सिंह के बयानों से सामने आए जेपीएससी के शीर्ष स्तर के खेल
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इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए सीआईडी ने टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह से लंबी पूछताछ की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रामबीर के अनुसार एसीएफ, एफआरओ के इंटरव्यू और 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन तथा उसकी निगरानी का स्पष्ट आदेश सीधे तौर पर जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा ही दिया गया था। रामबीर ने यह भी दावा किया कि इस परीक्षा से जुड़ी धांधली की अंदरूनी जानकारी श्वेता कुमारी गुप्ता के पास पहले से मौजूद थी। आरोप है कि श्वेता कुमारी गुप्ता ने एसीएफ एवं 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से ठीक पहले व्हाट्सएप के माध्यम से टीडीपीएल के कर्मचारी उस्मान और पीके सिंह के साथ गोपनीय डेटा साझा किया था, ताकि ओएमआर शीट और ओएसएम में सुनियोजित तरीके से मैनिपुलेशन किया जा सके।
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चेयरमैन की मेहरबानी और अधिकारियों के लगातार छुट्टी पर जाने की दास्तान
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सीआईडी जांच के दौरान खुद श्वेता कुमारी गुप्ता और अन्य अधिकारियों के बयानों से यह साफ हुआ है कि जेपीएससी के चेयरमैन एल ख्यांगते का विशेष संरक्षण और आशीर्वाद श्वेता कुमारी गुप्ता को प्राप्त था। जब परीक्षा नियंत्रक असीम किसपोट्टा एक सप्ताह की छुट्टी पर गए और लगातार अपनी छुट्टियां बढ़ाते रहे, तब अध्यक्ष ने उनके रूटीन कार्यों को संभालने का जिम्मा श्वेता को सौंप दिया था। बाद में असीम किसपोट्टा का ट्रांसफर कार्मिक विभाग में वेटिंग फॉर पोस्टिंग के रूप में होने पर, अध्यक्ष ने 8 जून 2025 को लिखित रूप से श्वेता को परीक्षा नियंत्रक का आधिकारिक दायित्व दे दिया। इसके अलावा 11वीं से 13वीं जेपीएससी के इंटरव्यू कराने की जिम्मेदारी भी अध्यक्ष ने श्वेता को ही सौंपी थी।
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प्रशासनिक फेरबदल, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया और सदस्यों की स्कूटनी
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इस प्रशासनिक हलचल के बीच जब लोकेश मिश्रा की पोस्टिंग परीक्षा नियंत्रक के पद पर हुई, तो वे भी योगदान देने के तुरंत बाद छुट्टी पर चले गए, जिससे दोबारा कामकाज श्वेता गुप्ता के हाथों में आ गया। बाद में लोकेश मिश्रा के लौटने के बावजूद अध्यक्ष ने श्वेता को ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी का रिजल्ट देखने का जिम्मा दिया और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए उपसचिव सरोजिनी तिर्की की टीम बनाई। श्वेता गुप्ता ने अपने बयान में बचाव करते हुए कहा कि वह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं थीं इसलिए रिजल्ट नहीं बनाना चाहती थीं, लेकिन अध्यक्ष के निर्देश पर उन्होंने मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंक जोड़कर रिजल्ट तैयार किया। इसके बाद उस तैयार रिजल्ट को जेपीएससी के तीनों सदस्यों—अजीत भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद—के पास स्कूटनी और दस्तावेज सत्यापन के लिए भेजा गया था, और सभी की प्रक्रिया पूरी होने तथा सेक्रेटरी के माध्यम से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही अध्यक्ष के कहने पर परिणाम का प्रकाशन किया गया था।

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