रांची। झारखंड में आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रहे आरक्षण सुधार आंदोलन ने पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के अधिकारों को खत्म करना नहीं है। वे आरक्षण और सामाजिक न्याय की मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और इसका लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं।
UGC के नियमों की समीक्षा की मांग
आंदोलनकारियों ने UGC Equity Regulations 2026 की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी होनी चाहिए।
इसके साथ ही SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक संशोधन पर विचार करने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वास्तविक पीड़ितों को कानून का पूरा संरक्षण मिलना चाहिए, वहीं झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के मामलों में भी निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए।
आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे
आंदोलन ने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में मेरिट तथा पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया है। IIT, IIM, मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों समेत अन्य संस्थानों में चयन और सीट आवंटन की प्रक्रिया को स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था के साथ मेहनत, योग्यता और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर चर्चा
आंदोलनकारियों ने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की मांग की है। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन लोगों तक भी प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए, जो अब तक अपेक्षित लाभ से वंचित हैं।
‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ की मांग
आंदोलन की एक प्रमुख मांग ‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ लगातार कुछ ही परिवारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऐसे परिवारों और लोगों को भी अवसर मिलना चाहिए, जिन्हें अब तक आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिला है।
संवैधानिक दायरे में व्यापक चर्चा की मांग
आरक्षण सुधार आंदोलन के सुमित दुबे ने कहा कि उनकी मांग किसी का अधिकार छीनने की नहीं है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के साथ मेरिट का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने सभी मुद्दों पर संवैधानिक और कानूनी दायरे में व्यापक चर्चा कर आवश्यक सुधार किए जाने की मांग की।

