8 से 30 नवंबर तक खूनी क्रांति, दमन विरोधी और शहीद सप्ताह मनाने की सूचना; रेलवे ट्रैक, सुरक्षा बलों के कैंप, सरकारी कार्यालयों और खनन क्षेत्रों की बढ़ाई जाएगी निगरानी
रांची। झारखंड में नक्सली गतिविधियों की आशंका को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने नवंबर महीने में 23 दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की ओर से 8 से 30 नवंबर तक लगातार तीन अलग-अलग सप्ताह मनाए जाने की सूचना के बाद यह अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान रेलवे संपत्तियों, सुरक्षा बलों के कैंप, सरकारी प्रतिष्ठानों, बैंक, खनन क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा बढ़ाने को कहा गया है।
हालांकि, झारखंड में नक्सली संगठन पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। बड़े पैमाने पर नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और पुनर्वास के बावजूद पुलिस मुख्यालय संभावित गतिविधियों को लेकर सतर्क है। आशंका जताई गई है कि संगठन इन कार्यक्रमों के दौरान अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए किसी अप्रिय घटना को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को भेजा अलर्ट
इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिरीक्षक (अभियान), झारखंड, रांची के कार्यालय से पत्र जारी किया गया है। यह पत्र रांची, जमशेदपुर और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षकों के अलावा राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों, झारखंड जगुआर और रेल पुलिस के अधिकारियों को भेजा गया है।
पत्र में संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संभावित घटनाओं को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई है।
नवंबर में नक्सलियों के तीन कार्यक्रम
पुलिस मुख्यालय के पत्र के अनुसार, भाकपा माओवादी संगठन की ओर से नवंबर में तीन अलग-अलग सप्ताह मनाए जाने की सूचना है।
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8 से 15 नवंबर 2026: खूनी क्रांति सप्ताह
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16 से 22 नवंबर 2026: दमन विरोधी सप्ताह
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24 से 30 नवंबर 2026: शहीद सप्ताह
पुलिस का मानना है कि संगठन की कमजोर स्थिति के बावजूद इन कार्यक्रमों के दौरान नक्सली किसी घटना को अंजाम देकर दहशत फैलाने या अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर सकते हैं।
रेलवे ट्रैक, स्टेशन और पुल-पुलियों पर विशेष निगरानी
अलर्ट में रेलवे क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। रेलवे ट्रैक, स्टेशन, रेलगाड़ियों, रेलवे साइडिंग और महत्वपूर्ण रेल लाइनों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। पुल-पुलियों, रेल ट्रैक के आसपास के इलाकों और रेलवे से जुड़े संस्थानों पर भी विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही रेल पुलिस और जिला पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा बलों के कैंप और सरकारी कार्यालय भी संवेदनशील
पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा बलों के कैंप, थाना, पुलिस पिकेट और सीआरपीएफ कैंपों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहने को कहा है। इसके अलावा प्रखंड, अंचल, अनुमंडल और जिला स्तर के सरकारी कार्यालयों, बैंक, वित्तीय संस्थानों तथा वन विभाग के कार्यालयों और गोदामों पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों को भी संभावित खतरे के मद्देनजर सतर्क रहने को कहा गया है।
मोबाइल टावर और खनन क्षेत्रों पर भी रहेगी नजर
दूरस्थ इलाकों में लगे मोबाइल बीटीएस टावर, कोल साइडिंग, कोल डंप और खदानों को भी विशेष निगरानी के दायरे में रखा गया है। पुलिस को राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और अन्य महत्वपूर्ण सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
बिना सत्यापन घटनास्थल पर नहीं भेजे जाएंगे जवान
पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा बलों की आवाजाही को लेकर विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि नक्सली छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस बल को घटनास्थल तक पहुंचने के लिए उकसा सकते हैं। इसके बाद रास्तों में लैंडमाइन या अन्य विस्फोटक लगाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की आशंका रहती है।
ऐसे में किसी भी घटना की सूचना मिलने पर बिना सत्यापन के पुलिस बल को घटनास्थल पर नहीं भेजने की हिदायत दी गई है। पहले सूचना की गहन जांच की जाए और उसके बाद जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जाए।
एसओपी का पालन और जवानों की ब्रीफिंग अनिवार्य
पुलिस मुख्यालय ने तीनों सप्ताह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सख्ती से पालन कराने को कहा है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की नियमित ब्रीफिंग करने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि संभावित खतरे को गंभीरता से लेते हुए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से तैयारी रखी जाए।

