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भारत सरकार का मेगा प्लान: मार्च 2027 तक थर्मल प्लांटों में होगा 55 मिलियन टन कोयले का पहाड़

अजय निराला/उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। गर्मियों में बिजली संकट से निपटने और देश के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू की है। सरकार ने 31 मार्च 2027 तक देश के सभी थर्मल पावर प्लांटों में 55 मिलियन टन कोयले का भंडार तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। फिलहाल यह भंडार करीब 18 मिलियन टन बताया जा रहा है। ऐसे में निर्धारित समय सीमा तक कोयले का स्टॉक लगभग तीन गुना बढ़ाना बड़ी चुनौती होगी।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड और भारतीय रेलवे की भूमिका अहम हो गई है। कोल इंडिया ने अक्टूबर 2026 में 67.2 मिलियन टन कोयले का उत्पादन और 70.3 मिलियन टन का डिस्पैच किया है। कंपनी के प्रदर्शन के बीच निवेशकों के लिए 10.25 रुपये प्रति शेयर के दूसरे अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की गई है।

वहीं, भारतीय रेलवे ने कोयला ढुलाई की क्षमता में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष के अंत तक इसमें सात प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि करने की तैयारी है। सरकार का जोर है कि बिजली उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण बड़े थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए, ताकि गर्मियों में बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।

सरकारी बिजली घरों की प्राथमिकता से निजी उद्योगों की बढ़ी मुश्किलें

सरकार के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का असर अब निजी उद्योगों पर भी पड़ने की आशंका है। थर्मल पावर प्लांटों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण निजी कैप्टिव पावर प्लांटों के साथ स्टील और सीमेंट उद्योगों को भी अनुबंधित कोयले की आपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि कई उद्योगों को अपने निर्धारित कोयले के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें महंगे स्पॉट ऑक्शन और खुले बाजार से कोयला खरीदने की मजबूरी हो रही है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने और उद्योगों के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है।

55 मिलियन टन का लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल कोयले का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि समय पर उसे बिजली घरों तक पहुंचाना भी है। मौजूदा आपूर्ति में खदानों में पहले से उपलब्ध कोयले के स्टॉक की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है।

आने वाले महीनों में रेलवे रैक की उपलब्धता, सर्दियों में कोहरे के कारण परिवहन में संभावित देरी और निजी उद्योगों की कोयला मांग के बीच संतुलन बनाना होगा। ऐसे में सवाल यह है कि क्या कोल इंडिया बिजली क्षेत्र की जरूरतों के साथ-साथ निजी उद्योगों की मांग भी पूरी कर पाएगी? मार्च 2027 तक 55 मिलियन टन कोयले का भंडार तैयार करना केंद्र सरकार, कोल इंडिया और रेलवे के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।

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