HomeBreaking Newsबड़कागांव के इंद्रा में अवैध कोयला खदान की चाल धंसी, एक मजदूर...

बड़कागांव के इंद्रा में अवैध कोयला खदान की चाल धंसी, एक मजदूर की मौत, दो गंभीर

गोंदलपुरा के 30 वर्षीय कालेश्वर महतो ने गंवाई जान, बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार करने की चर्चा; पहले भी कई मजदूरों की जा चुकी है जान
गणेश सोरेन के खदान में हुई घटना, गोंदलपुरा गांव के मजदूर की गई जान
हजारीबाग। जिले के बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत नापो पंचायत के इंद्रा में अवैध कोयला खदान में चाल धंसने से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूरों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घटना गुरुवार सुबह की बताई जा रही है। मृतक की पहचान बड़कागांव थाना क्षेत्र के गोंदलपुरा गांव के सिमराडीह टोला निवासी कालेश्वर महतो (30 वर्ष) के रूप में हुई है। वह बाजो महतो (मास्टर साहब) के पुत्र थे।

बताया जाता है कि कालेश्वर महतो अपने पीछे एक पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गए हैं। घटना के बाद कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

इंद्रा और लूरूंगा में चल रहीं दर्जनों अवैध खदानें

स्थानीय जानकारों के अनुसार, इंद्रा और लूरूंगा क्षेत्र में दर्जनों अवैध कोयला खदानें संचालित हो रही हैं। बताया जाता है कि जिस स्थान पर खनन किया जा रहा है, वह आरक्षित वन भूमि का हिस्सा है। यहां से निकाले गए कोयले को पहले ट्रैक्टरों के जरिए स्टॉक में जमा किया जाता है। इसके बाद हाइवा और ट्रेलर के माध्यम से दूसरे स्थानों पर भेजा जाता है।

सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कोयले की आपूर्ति रामगढ़ जिले के कुजू और हजारीबाग जिले के गिद्दी थाना क्षेत्र स्थित कुछ स्पंज आयरन प्लांटों तक की जाती है।

गरीबी का फायदा उठाकर मजदूरों की जान से खिलवाड़

स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी और परिवार के भरण-पोषण की मजबूरी में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर अवैध खदानों में काम करने को विवश हैं। आरोप है कि कोयला कारोबार से जुड़े लोग मजदूरों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे असुरक्षित परिस्थितियों में खनन कराते हैं।

इस क्षेत्र में पहले भी कई मजदूर अवैध खनन के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। आरोप यह भी है कि हादसे में मजदूर की मौत होने पर परिजन दबाव और डर के कारण खुलकर विरोध तक नहीं कर पाते। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की कथित अनदेखी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

लगातार हो रहे हादसों के बावजूद इंद्रा और लूरूंगा में अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगने से जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि ताजा घटना के बाद प्रशासन अवैध खदानों के संचालन, मजदूरों की सुरक्षा और कोयले के अवैध कारोबार की जांच के लिए क्या कदम उठाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments