रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में महज एक साल के भीतर दो वरिष्ठ मंत्रियों के असमय निधन के बाद कैबिनेट में दो पद खाली हो गए हैं। ऐसे में राज्य में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द खाली पदों को भरने का फैसला कर सकते हैं।
पहले तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन और अब मुख्यमंत्री के करीबी एवं कद्दावर मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन के बाद सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
एक साल में दो मंत्रियों का असमय निधन
अगस्त 2025 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन अपने घर में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ। बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
रामदास सोरेन के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे ने जीत दर्ज की। हालांकि, शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पास ही रखी।
इसके बाद 6 सितंबर 2026 को कैबिनेट मंत्री सुदिव्य सोनू का अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही हेमंत सरकार के मंत्रिमंडल में दूसरा पद भी खाली हो गया।
सुदिव्य सोनू के पास थे कई अहम विभाग
सुदिव्य सोनू झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास—
- नगर विकास विभाग
- कला, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग
- खेलकूद विभाग
- उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग
जैसी अहम जिम्मेदारियां थीं।
इन विभागों के सुचारू संचालन के लिए जल्द ही किसी पूर्णकालिक मंत्री को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
श्वेता शर्मा को मिल सकती है कैबिनेट में जगह
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को हेमंत सोरेन कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पिछला राजनीतिक रिकॉर्ड इस तरह की संभावना को बल देता है।
क्या पुराना फॉर्मूला अपनाएंगे हेमंत सोरेन?
हेमंत सोरेन सरकार पहले भी किसी मंत्री के निधन के बाद उनके परिवार के सदस्य को राजनीतिक जिम्मेदारी देने की रणनीति अपना चुकी है।
हाजी हुसैन अंसारी के मामले में
साल 2019 के कार्यकाल के दौरान मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को पहले मंत्री बनाया गया और बाद में चुनाव मैदान में उतारा गया। यह रणनीति सफल साबित हुई।
जगन्नाथ महतो के मामले में
इसी तरह पूर्व शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया। बाद में उन्हें चुनाव मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज की।
गिरिडीह उपचुनाव पर भी नजर
सुदिव्य सोनू के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि हेमंत सोरेन सरकार पुरानी रणनीति को एक बार फिर अपना सकती है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि श्वेता शर्मा को पहले कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है और बाद में उन्हें गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। वहीं, कैबिनेट में खाली दूसरी सीट पर किसी अन्य विधायक को मौका मिल सकता है।
हालांकि, कैबिनेट विस्तार और नए मंत्रियों के नामों को लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सत्तारूढ़ गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व को करना है।

