नई दिल्ली। भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए हथियारों, मिसाइलों और टैंकों में इस्तेमाल होने वाले अधिक से अधिक उपकरण देश में ही तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को 405 रणनीतिक रक्षा वस्तुओं की छठी सूची जारी की है।
इस सूची में विभिन्न मशीनों के हिस्से, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट, सब-सिस्टम और कच्चा माल शामिल हैं। हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमानों से जुड़े उपकरणों के अलावा टैंक और बख्तरबंद वाहनों के पार्ट्स, रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तथा टैंक रोधी गोला-बारूद भी इसमें शामिल हैं।
3,070 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यदि सूची में शामिल इन वस्तुओं का उत्पादन भारतीय कंपनियों द्वारा किया जाता है तो इससे करीब 3,070 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आयात को कम करना और देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।
मंत्रालय की ओर से जारी सूची में प्रत्येक उत्पाद के स्वदेशीकरण के लिए निर्धारित समय-सीमा भी तय की गई है। इसके तहत रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है।
एमएसएमई की होगी अहम भूमिका
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस अभियान में देश के उद्योगों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और घरेलू रक्षा उत्पादन प्रणाली और मजबूत होगी।
सरकार का मानना है कि रणनीतिक रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण से आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही भारतीय रक्षा उद्योग को विस्तार मिलेगा और देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।

