नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत के लिए खाद्य और उर्वरक संकट को लेकर 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने राहत की बात कही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत के सामने किसी बड़े खाद्य या उर्वरक संकट की आशंका नहीं है।
पनगढ़िया ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि भारत ने हाल के ऊर्जा झटकों का सामना करने की क्षमता दिखाई है और देश में उर्वरक की उपलब्धता भी मजबूत हुई है। उनके मुताबिक घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे देशों से भी उर्वरक की खरीद की जा सकती है।
उर्वरक की सप्लाई को लेकर क्या बोले पनगढ़िया?
पनगढ़िया के अनुसार भारत की उर्वरक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ घरेलू उर्वरक संयंत्रों को फिर से शुरू किया गया है, जबकि जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से भी आपूर्ति हासिल की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अनिश्चितता जरूर पैदा हुई है, लेकिन भारत पर वैसा बड़ा ऊर्जा झटका नहीं पड़ा, जिसकी आशंका जताई जा रही थी।
खाद्य संकट पर भी जताया भरोसा
पनगढ़िया ने कहा कि अगर यूक्रेन जैसे प्रमुख खाद्य उत्पादक देश से वैश्विक आपूर्ति कम होती है तो भारतीय कृषि उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता है।
उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत को खाद्य और उर्वरक संकट को लेकर गंभीर चिंता करने की जरूरत नहीं है।
जयशंकर की चेतावनी के बीच आया बयान
पनगढ़िया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में आने वाले महीनों में बड़े वैश्विक खाद्य संकट की आशंका जताई थी। जयशंकर ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण अनाज निर्यात और उर्वरक उत्पादन पर पड़ रहे असर का उल्लेख किया था।
वहीं, वित्त मंत्रालय की सितंबर 2026 की आर्थिक समीक्षा में भी भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को भारत के लिए महंगाई से जुड़े जोखिमों के रूप में चिन्हित किया गया है।
उर्वरक क्षेत्र में चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि, उपलब्ध विश्लेषणों के मुताबिक भारत में उर्वरक आपूर्ति की स्थिति सभी श्रेणियों में एक जैसी नहीं है। यूरिया की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है, जबकि DAP और कुछ कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की आपूर्ति तथा कच्चे माल की कीमतों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
ऐसे में पनगढ़िया का आकलन मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था और भारत की झटकों को झेलने की क्षमता पर आधारित है, जबकि वैश्विक संघर्ष, ऊर्जा कीमतों, मौसम और उर्वरक कच्चे माल की उपलब्धता आगे भी खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।

