पटना: देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के बदलते नेटवर्क के बीच बिहार सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है। हालिया मामलों और जांच में बिहार का इस्तेमाल नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए ट्रांजिट रूट के तौर पर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य जांच एजेंसियां राज्य में सक्रिय नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं।
हाल के दिनों में बिहार में गांजा, हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक तस्कर लगातार अपने रास्ते और तरीके बदल रहे हैं। सड़कों पर निगरानी बढ़ने के बाद कुछ मामलों में रेल मार्ग का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
म्यांमार से बिहार तक पहुंच रही हेरोइन
जांच से जुड़े मामलों में यह भी सामने आया है कि पूर्वोत्तर के रास्ते नशीले पदार्थ बिहार तक पहुंच रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार से मणिपुर, मिजोरम और असम के रास्ते हेरोइन की खेप बिहार पहुंचने की आशंका सामने आई है।
इसके बाद इन खेपों को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के लिए बिहार के अलग-अलग रूट का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है।
सड़क पर सख्ती बढ़ी तो रेल रूट का इस्तेमाल
बिहार में ड्रग्स तस्करी के बदलते तौर-तरीकों को लेकर हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़कों पर पुलिस और जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ने के बाद तस्करों ने रेल मार्ग का इस्तेमाल बढ़ाया है।
लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए नशीले पदार्थों को बिहार के विभिन्न स्टेशनों तक लाकर यहां से दूसरे राज्यों में भेजे जाने की आशंका सामने आई है। इससे रेलवे स्टेशन और रेल मार्ग भी जांच एजेंसियों की निगरानी के दायरे में आ गए हैं।
752 किलो से ज्यादा गांजा बरामद
सितंबर में बिहार में राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 752.390 किलोग्राम गांजा बरामद किया और एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई राज्य में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क की ओर भी संकेत करती है।
इससे पहले गया जंक्शन पर तेजस राजधानी एक्सप्रेस से करीब 17.7 किलो गांजा बरामद किया गया था। रेल पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
मक्के की खेप में छिपाकर भेजी जा रही थी ड्रग्स
मुजफ्फरपुर में भी हाल में एक मामले में मक्के की खेप के भीतर नशीला पदार्थ छिपाकर भेजे जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 55 किलो मेथ से जुड़े मामले में जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही हैं।
इस तरह के मामलों से यह संकेत मिलता है कि तस्कर वैध माल, परिवहन नेटवर्क और अलग-अलग लॉजिस्टिक चैनलों का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की आवाजाही के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं।
NCB की रणनीति में ट्रांजिट नेटवर्क पर फोकस
NCB ने वर्ष 2026-29 के लिए तैयार अपने Vision Document on Narcotics Control में ड्रग कार्टेल और नेटवर्क को खत्म करने, सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट और क्रिप्टो आधारित तस्करी की जांच को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। केंद्र ने राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की Anti-Narcotics Task Force के प्रमुखों का राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें ड्रग कार्टेल, सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट और क्रिप्टो से जुड़े मामलों पर चर्चा प्रस्तावित है।
बिहार में सामने आ रहे मामलों के बीच अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ नशीले पदार्थों की खेप पकड़ने की नहीं, बल्कि इनके स्रोत, ट्रांजिट रूट, स्थानीय नेटवर्क और अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की भी है।

