धनबाद: झारखंड के धनबाद स्थित IIT (ISM) धनबाद ने सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं की टीम ने न्यूरोमॉर्फिक स्पाइकिंग आर्किटेक्चर आधारित अल्ट्रा-लो-पावर चिप विकसित करने पर काम किया है। यह तकनीक मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से प्रेरित कंप्यूटिंग सिस्टम की दिशा में अहम मानी जा रही है।
IIT (ISM) की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह शोध MeitY, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना के तहत किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों की सहायता के लिए स्मार्ट ग्लास जैसी तकनीक विकसित करना है। इस परियोजना का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार रंजन कर रहे हैं।
मानव मस्तिष्क से प्रेरित है न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग
न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग ऐसी तकनीक है, जिसमें कंप्यूटिंग सिस्टम को मानव मस्तिष्क में होने वाली सूचना प्रक्रिया से प्रेरित तरीके से डिजाइन किया जाता है। इसका लक्ष्य कम ऊर्जा में तेजी से डेटा प्रोसेसिंग और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।
IIT-ISM धनबाद की टीम का काम इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। संस्थान में Memristor आधारित Multilayer Neural Networks और न्यूरोमॉर्फिक सिस्टम से जुड़े शोध भी चल रहे हैं।
स्मार्ट ग्लास में हो सकता है इस्तेमाल
इस तकनीक का एक प्रमुख उद्देश्य असिस्टिव स्मार्ट ग्लास तैयार करना है। ऐसे स्मार्ट ग्लास दृष्टिबाधित लोगों को आसपास की वस्तुओं और परिस्थितियों को समझने में सहायता देने वाली तकनीक से लैस किए जा सकते हैं।
IIT-ISM के प्रोजेक्ट दस्तावेज के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों की सहायता करने वाला स्मार्ट ग्लास डिजाइन और विकसित करना है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में IIT-ISM की बढ़ती भूमिका
IIT (ISM) धनबाद की इस पहल को भारत में स्वदेशी चिप डिजाइन और कम ऊर्जा वाली सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास के व्यापक प्रयासों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
हाल में संस्थान की एक टीम द्वारा विकसित डिजिटल ASIC चिप को Semicon India 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। यह चिप MeitY की Ultra-Low Power Assistive Smart Glass परियोजना के तहत विकसित की गई थी और इसका निर्माण Semiconductor Laboratory (SCL), मोहाली में किया गया।
AI और भविष्य की कंप्यूटिंग में संभावनाएं
न्यूरोमॉर्फिक तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में केवल स्मार्ट ग्लास तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। इससे जुड़े शोध का विस्तार एज-AI, स्मार्ट सेंसर, पहनने योग्य उपकरण, स्वास्थ्य तकनीक और रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों तक हो सकता है।
IIT-ISM के शोधकर्ता डॉ. राजीव कुमार रंजन का शोध क्षेत्र भी न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग, मेमरी-आधारित कंप्यूटिंग और VLSI सिस्टम से जुड़ा है। संस्थान की वेबसाइट पर उनके 2026 के कई शोध कार्य न्यूरोमॉर्फिक सर्किट और मेमिस्टिव तकनीक से संबंधित दर्ज हैं।
क्या है न्यूरोमॉर्फिक चिप?
सरल शब्दों में कहें तो न्यूरोमॉर्फिक चिप ऐसी कंप्यूटिंग तकनीक है, जो मानव मस्तिष्क में मौजूद न्यूरॉन्स और उनके बीच होने वाले सिग्नल प्रोसेसिंग से प्रेरणा लेती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कंप्यूटिंग की तुलना में कुछ खास प्रकार के AI और सेंसर-आधारित कार्यों को अधिक ऊर्जा-कुशल तरीके से करना है।
IIT-ISM धनबाद का यह शोध भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर डिजाइन, AI हार्डवेयर और कम ऊर्जा वाली भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीक के विकास की दिशा में संस्थान की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।



