देवघर: बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। शहर के रोहिणी स्थित कृष्ण मंदिर में इस बार भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। यह मंदिर अपनी करीब छह दशक पुरानी अखंड कीर्तन की परंपरा के लिए खास पहचान रखता है। यहां वर्ष 1967 से लगातार 24 घंटे ‘हरे कृष्णा-हरे रामा’ का जाप किया जा रहा है।
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी धनंजय पंडित के अनुसार, लीलानंद ठाकुर ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। मंदिर की स्थापना के बाद क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना को लेकर 108 वर्षों तक लगातार हरिनाम संकीर्तन जारी रखने का संकल्प लिया गया था। इसी संकल्प के तहत पिछले करीब 60 वर्षों से स्थानीय श्रद्धालु इस परंपरा को पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं।
मंदिर में दिन हो या रात, मौसम कैसा भी हो, कीर्तन का सिलसिला नहीं रुकता। अखंड संकीर्तन को जारी रखने के लिए श्रद्धालुओं की अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो तीन शिफ्टों में अपनी जिम्मेदारी संभालती हैं। यही वजह है कि मंदिर परिसर हर समय ‘हरे कृष्णा-हरे रामा’ के जयघोष से गूंजता रहता है।
रोहिणी के इस कृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा की अष्टधातु की प्रतिमाएं स्थापित हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन राधा-कृष्ण को झूला झुलाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान को झूला झुलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर में बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है।
जन्माष्टमी के दिन मंदिर का माहौल और भी खास हो जाता है। विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है। मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होता है, मानो देवघर में ही वृंदावन की भक्ति और कृष्ण प्रेम का वातावरण बन गया हो। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक गतिविधियां भी की जाती हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से स्थानीय लोगों के बीच वस्त्र, भजन और प्रसाद का वितरण किया जाता है।
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि छह दशक से जारी यह परंपरा किसी विशेष संसाधन की वजह से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के कारण कायम है। उनका मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही इतने लंबे समय से अखंड संकीर्तन बिना किसी रुकावट के जारी है। मंदिर से जुड़े ट्रस्ट की ओर से वर्ष 2000 से विद्यालय का संचालन भी किया जा रहा है। इसके अलावा ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।
पुजारी धनंजय पंडित बताते हैं कि सुरक्षा कारणों से देर रात मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन मंदिर के भीतर अखंड कीर्तन जारी रहता है। श्रद्धालुओं की टीम रात के समय भी संकीर्तन की जिम्मेदारी संभालती है, जिससे भगवान का नाम जाप एक पल के लिए भी नहीं रुकता।
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करेंगे।

