धनबाद। धनबाद के बरमसिया स्थित भूदा की रहने वाली पूनम कुमारी ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक परेशानियां भी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकतीं। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाली पूनम ने अपनी मेहनत के दम पर NEET परीक्षा पहले ही प्रयास में क्वालीफाई कर ली।
अब उसे धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) में MBBS की पढ़ाई के लिए सीट मिल गई है। हालांकि, मेडिकल की पढ़ाई का खर्च उसके परिवार के लिए बड़ी चुनौती था। इसी बीच धनबाद डीसी आदित्य रंजन ने उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया और उसकी मेडिकल शिक्षा का खर्च उठाने की पहल की।
12वीं में हासिल किए थे 97.8 प्रतिशत अंक
पूनम ने धनबाद के SSLNT सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही पूनम ने इंटर की परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए।
डॉक्टर बनने का सपना पूनम ने बचपन से देखा था। इसके बाद उसने NEET की तैयारी शुरू की। महंगे कोचिंग संस्थानों की सुविधा नहीं होने के बावजूद उसने स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन और सेल्फ स्टडी के जरिए अपनी तैयारी जारी रखी।
लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि पूनम ने अपने पहले प्रयास में ही NEET में सफलता हासिल कर ली। परीक्षा में उसे 582 अंक मिले और उसकी ऑल इंडिया रैंक 16,972 रही।
SNMMCH में मिला दाखिला, लेकिन फीस की चिंता बढ़ी
NEET काउंसलिंग के बाद पूनम को धनबाद के SNMMCH में MBBS की सीट मिली। परिवार के लिए यह बेहद खुशी का पल था, लेकिन दाखिले के बाद मेडिकल शिक्षा के खर्च की चिंता भी सामने आ गई।
पूनम के पिता धर्मू गोराई दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां पिपू देवी गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे आसानी से लाखों रुपये खर्च कर बेटी की मेडिकल पढ़ाई पूरी करा सकें।
इसी दौरान पूनम की सफलता और परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी धनबाद डीसी आदित्य रंजन तक पहुंची।
डीसी ने उठाई मेडिकल शिक्षा की जिम्मेदारी
पूनम की परिस्थिति को देखते हुए डीसी आदित्य रंजन ने उसकी मदद करने का फैसला लिया। उन्होंने पूनम को अडॉप्ट करते हुए उसकी मेडिकल शिक्षा से जुड़े खर्चों को उठाने की पहल की।
इसी क्रम में MBBS के प्रथम वर्ष की फीस समेत एक साल की राशि मेडिकल कॉलेज में जमा करा दी गई है। इसके अलावा पूनम के रहने, खाने और पढ़ाई से जुड़े खर्चों में भी सहयोग देने का निर्णय लिया गया है।
पूनम के लिए यह मदद केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि उस सपने को पूरा करने का सहारा है, जिसे उसने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिंदा रखा।
‘डीसी ने कहा था- पढ़ाई का खर्च मैं उठाऊंगा’
पूनम के मुताबिक, NEET में सफलता मिलने के बाद जब डीसी आदित्य रंजन ने उससे कहा था कि उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जाएगा, तो उसे अपने सपने के पूरा होने की उम्मीद मिली।
पूनम का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के बाद फीस और दूसरे खर्चों का बोझ परिवार के लिए काफी मुश्किल होता। ऐसे समय में डीसी की मदद से परिवार को बड़ी राहत मिली है।
वह डीसी के प्रति आभार जताते हुए कहती है कि उनके सहयोग ने उसके डॉक्टर बनने के रास्ते में खड़ी सबसे बड़ी आर्थिक बाधा को दूर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज ने भी पूनम की प्रतिभा को सराहा
SNMMCH के वरीय प्रबंधक डॉ. सुमन कुमार के अनुसार, पूनम पढ़ाई में काफी प्रतिभाशाली छात्रा रही है। उन्होंने बताया कि 12वीं में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद उसने NEET में भी अच्छा प्रदर्शन किया।
उनके अनुसार, पूनम की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलने के बाद डीसी ने उसकी मदद का फैसला लिया। इस पहल से उन विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिल सकती है, जो प्रतिभावान होने के बावजूद आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते।
डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की मदद करना चाहती है पूनम
पूनम का सपना सिर्फ डॉक्टर बनकर अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं है। वह भविष्य में उन जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहती है, जिन्हें आर्थिक परेशानी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
पूनम बताती है कि बचपन में जब उसने डॉक्टरों को मरीजों की मदद करते देखा, तभी उसके मन में डॉक्टर बनने की इच्छा पैदा हुई। अब वह डॉक्टर बनकर ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेवा करना चाहती है।
जिस तरह आज उसे किसी ने मुश्किल समय में सहारा दिया है, उसी तरह भविष्य में वह भी जरूरतमंद लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाना चाहती है।
मां बोलीं- बेटी का सपना अब पूरा होगा
पूनम की मां पिपू देवी के लिए बेटी की सफलता गर्व का पल है। वह बताती हैं कि पूनम बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छी रही है और उन्हें हमेशा भरोसा था कि बेटी जीवन में कुछ बड़ा करेगी।
हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सबसे बड़ी चिंता थी। डीसी की मदद मिलने के बाद परिवार की यह चिंता काफी हद तक दूर हो गई है।
पूनम की मां की इच्छा है कि उनकी बेटी एक अच्छी डॉक्टर बने और आगे चलकर लोगों की सेवा करे।
पूनम की कहानी देती है मेहनत और हौसले का संदेश
पूनम की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं। पूनम ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और स्कूल की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी की।
वह दूसरे विद्यार्थियों को भी सलाह देती है कि पहले अपना लक्ष्य तय करें और फिर लगातार मेहनत करें। उसका मानना है कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत से सफलता का रास्ता निकाला जा सकता है।
दिहाड़ी मजदूर की बेटी से मेडिकल कॉलेज की छात्रा बनने तक का पूनम का सफर यही संदेश देता है कि प्रतिभा किसी बड़े घर की मोहताज नहीं होती, उसे सिर्फ सही अवसर और सहयोग की जरूरत होती है।

