नेपाल में 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर टूटने और भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में कई परिवार उजड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इसी त्रासदी के बीच नुवाकोट जिले के गेरखुटार से सामने आई एक तस्वीर ने लोगों को भावुक कर दिया है।
गेरखुटार में कक्षा 9वीं का छात्र बिनेश तमांग उस स्थान पर लकड़ी के लट्ठे जमा करता दिखाई दिया, जहां कुछ दिन पहले आई भयावह बाढ़ उसके पिता को बहा ले गई थी। बाढ़ ने इलाके में सड़क और आसपास के हिस्सों को भी भारी नुकसान पहुंचाया।
खबर की बड़ी बातें
-
26 अगस्त को नेपाल में ग्लेशियर टूटने और भारी बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड।
-
नुवाकोट जिले के गेरखुटार इलाके में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही।
-
कक्षा 9वीं के छात्र बिनेश तमांग ने बाढ़ में अपने पिता को खो दिया।
-
बिनेश उसी जगह लकड़ियां जमा करता दिखा, जहां उसके पिता बह गए थे।
-
बाढ़ के पानी में पेड़ों के तने और डालियां बचीं, लेकिन कई लोग लापता हो गए।
-
बिनेश के चाचा ने भी लकड़ी के लट्ठे इकट्ठा करने में उसकी मदद की।
-
मृतक रमेश तमांग रसुवा के लिए यात्री बस चलाते थे।
पिता को खोने के बाद बेटे की दर्दनाक तस्वीर
बाढ़ की भयावहता के बीच बिनेश तमांग की तस्वीर सामने आई है। सिर मुंडवाए और चेहरे पर गहरी उदासी लिए बिनेश उसी जगह लकड़ी के लट्ठे इकट्ठा कर रहा था, जहां उसके पिता रमेश तमांग बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
बताया गया कि बिनेश के चाचा ने भी उसके साथ लकड़ियां जमा करने में मदद की। तेज बहाव अपने साथ पेड़ों के तने और डालियां तो छोड़ गया, लेकिन रमेश तमांग को अपने साथ बहा ले गया।
बस लेकर निकले थे रमेश तमांग
रमेश तमांग रसुवा के लिए यात्री बस चलाते थे। 26 अगस्त का दिन उनके परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन गया। जिस समय इलाके में अचानक जलप्रलय आया, उस वक्त वह त्रिशूली नदी के किनारे बने हाईवे से बस लेकर निकले थे।
अचानक बढ़े बाढ़ के पानी ने पासांग-ल्हामू हाईवे, जिसे त्रिशूली हाईवे के नाम से भी जाना जाता है, के कई हिस्सों को प्रभावित किया। इसी दौरान रमेश तमांग भी बाढ़ की चपेट में आ गए।
गेरखुटार में तबाही के निशान
गेरखुटार नेपाल के बागमती प्रांत के नुवाकोट जिले में स्थित है। फ्लैश फ्लड ने यहां सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। बाढ़ के बाद इलाके में जगह-जगह मलबा, पेड़ों के तने और टूटी संरचनाएं तबाही की कहानी बयां कर रही हैं।
इस त्रासदी के बीच बिनेश की तस्वीर उस दर्द को सामने लाती है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। एक बेटे का अपने पिता को खोने के बाद उसी जगह खड़े होकर लकड़ियां बटोरना नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता को दिखाता है।

