देवघर: शारदीय नवरात्र के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दुर्गा पूजा की विशिष्ट परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है। मंदिर में महानवमी के दिन तांत्रिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना होगी। वहीं, बंगला पंचांग के अनुसार बाबा मंदिर में बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। अष्टमी, नवमी और दशमी की तिथियों में अंतर के कारण श्रद्धालुओं के बीच पूजा के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर असमंजस
शारदीय नवरात्र में महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी का विशेष धार्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि रविवार को शुरू होकर सोमवार की सुबह तक रही। इस कारण कुछ स्थानों पर रविवार की देर रात, जबकि अन्य जगहों पर सोमवार की सुबह तक अष्टमी की पूजा की गई।
अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं के कारण पूजा की तिथियों में अंतर देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और निर्धारित पूजा-विधि के अनुसार मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।
बाबा धाम में तांत्रिक विधि-विधान से होगी महानवमी पूजा
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दुर्गा पूजा की अपनी विशिष्ट परंपरा है। मंदिर के पुरोहितों के अनुसार, अष्टमी की पूजा संपन्न होने के बाद नवमी की पूजा शुरू हो गई है। मंगलवार को महानवमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
इस दौरान तांत्रिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी। निर्धारित परंपरा के अनुसार बलि की रस्म भी निभाई जाएगी। इसके साथ ही हवन कुंड में विशेष पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
महानवमी पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से भक्तों को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
बंगला पंचांग के अनुसार बुधवार को मनेगी विजयादशमी
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विजयादशमी का आयोजन बंगला पंचांग के अनुसार किया जाएगा। मंदिर के पुरोहितों के मुताबिक, बुधवार को दशमी पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 11 मिनट बताया गया है। इसी मुहूर्त के अनुसार मंदिर में मां दुर्गा की पूजा संपन्न कराई जाएगी।
वहीं, अन्य स्थानों पर प्रचलित पंचांग और स्थानीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार को भी दशमी की पूजा की जा सकती है। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में नवरात्र समापन और विजयादशमी के आयोजन के दिन में अंतर देखने को मिल रहा है।
बाबा मंदिर में दस दिनों तक होती है हवन कुंड में पूजा
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दुर्गा पूजा के दौरान विशेष हवन कुंड खोला जाता है। इस हवन कुंड में दस दिनों तक मंत्रोच्चार और निर्धारित विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर के पुरोहित महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दस दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद परंपरा के अनुसार हवन कुंड को अगले एक वर्ष के लिए बंद कर दिया जाता है। अगले साल दुर्गा पूजा के अवसर पर इसे फिर खोला जाता है और पूजा की प्रक्रिया शुरू होती है।
धर्म और शक्ति की उपासना का प्रतीक है विजयादशमी
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में भी यह पर्व मनाया जाता है।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में अष्टमी से विजयादशमी तक होने वाले विशेष अनुष्ठान सदियों से चली आ रही धार्मिक आस्था और परंपराओं का हिस्सा हैं।

