नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों पर पथराव, रेलवे संपत्ति की चोरी और पटरियों पर अनधिकृत आवाजाही रोकने के लिए ड्रोन निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। ईस्ट कोस्ट रेलवे के तीन मंडलों में फिलहाल 11 ड्रोन तैनात हैं। रेलवे की योजना मार्च 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 22 करने की है। इससे संवेदनशील रेलखंडों, स्टेशनों और रेलवे परिसरों की निगरानी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
284 स्टेशनों और हजारों किलोमीटर ट्रैक पर नजर
ईस्ट कोस्ट रेलवे के खुर्दा रोड, संबलपुर और रायगढ़ा मंडलों में ड्रोन के जरिये निगरानी की जा रही है। खुर्दा रोड मंडल में चार, संबलपुर में छह और रायगढ़ा में एक ड्रोन तैनात है। इनकी मदद से 284 स्टेशनों, 2,708 रूट किलोमीटर और 6,072 ट्रैक किलोमीटर के दायरे पर नजर रखी जा रही है।
रेलवे की योजना के अनुसार, मार्च 2027 तक ड्रोन की संख्या दोगुनी करने से निगरानी का दायरा और व्यापक होगा। खासकर उन इलाकों में इसका फायदा मिलेगा, जहां सुरक्षा कर्मियों की नियमित पहुंच मुश्किल होती है।
नौ महीने में ड्रोन से 3,033 उड़ानें
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच ईस्ट कोस्ट रेलवे में ड्रोन से कुल 3,033 उड़ानें संचालित की गईं। इनमें संबलपुर मंडल में 1,329, रायगढ़ा में 1,024 और खुर्दा रोड मंडल में 680 उड़ानें शामिल हैं।
इनमें से 1,265 उड़ानें संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए थीं। ड्रोन के जरिये पथराव, तोड़फोड़, केबल चोरी और आग लगने जैसी घटनाओं की आशंका वाले स्थानों पर नजर रखी जा रही है।
नाइट विजन और थर्मल कैमरों से लैस हैं ड्रोन
ड्रोन में नाइट विजन और थर्मल कैमरों जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे रात के समय भी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में मदद मिलती है। जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों, सुरंगों, पुलों और सुनसान रेलखंडों के अलावा रेलवे स्टेशनों तथा कोचिंग यार्ड की निगरानी में भी इनका उपयोग किया जा रहा है।
एक ड्रोन टीम लगभग 8 से 10 किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी कर सकती है। लाइव वीडियो और ऑडियो चेतावनी के माध्यम से लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने और पथराव जैसी गतिविधियों से रोकने में भी मदद मिलती है।
यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में भी मदद
ड्रोन निगरानी का इस्तेमाल केवल रेलवे ट्रैक की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही पर नजर रखने तथा जरूरत के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था संभालने में भी इनसे मदद मिलती है। पुरी की रथ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। महिला यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी ‘मेरी सहेली’ पहल में भी इनका उपयोग किया जा रहा है।
रेलवे ट्रैक पर अवैध प्रवेश पड़ सकता है भारी
रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करना जानलेवा हो सकता है। रेलवे प्रशासन लोगों से अपील करता है कि वे पटरियों को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल न करें और ट्रैक पार करने के लिए निर्धारित रास्तों का ही उपयोग करें। रेलवे परिसरों में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने से भी सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।
ड्रोन निगरानी बढ़ाने की इस पहल का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता लगाना, रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना और यात्रियों के लिए सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने में मदद करना है।

