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देश की आजादी में झारखंड के वीर सपूतों का भी बड़ा योगदान : रबीन्द्र नाथ महतो

रांची। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को झारखंड विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने झंडोत्तोलन किया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास को स्मरण करने, वर्तमान का मूल्यांकन करने और भविष्य के भारत के प्रति अपने दायित्व को दोहराने का दिन है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति, संस्था या क्षेत्र के संघर्ष का परिणाम नहीं थी। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को जनशक्ति में बदला, जबकि जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक, लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता के लिए अदम्य साहस और पूर्ण समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने खुदीराम बोस समेत स्वतंत्रता संग्राम के अन्य सेनानियों के बलिदान को भी याद किया।

झारखंड के वीर सपूतों को नमन करते हुए रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि बाबा तिलका मांझी ने 1784 में अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध का बिगुल बजाया था। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने 1855 के संथाल हूल का नेतृत्व किया। धरती आबा बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती देने के साथ अपने समाज के अधिकार, आत्मसम्मान और अस्तित्व की आवाज को भी मजबूत किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन सभी सेनानियों की विरासत हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं थी, बल्कि सम्मान के साथ जीने और अपना भविष्य स्वयं निर्धारित करने की आकांक्षा भी थी।

अध्यक्ष ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन इसके साथ राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी भी आई। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत ने स्वयं को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। भारत ने शुरुआत से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को स्वीकार किया, जिसका अर्थ है कि देश के सबसे गरीब और सबसे संपन्न नागरिक के वोट का मूल्य समान है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र का अर्थ संविधान की सर्वोच्चता, संस्थाओं की गरिमा, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का सम्मान और नागरिकों के प्रति जवाबदेही भी है। ऐसे में विधानसभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। विधानसभा केवल कानून बनाने का स्थान नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं और अपेक्षाओं का संवैधानिक मंच है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं और सरकार तथा विपक्ष की भूमिकाएं भी अलग हो सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र की मर्यादा और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता साझा होनी चाहिए।

पश्चिमी सिंहभूम में मंत्री दीपक बिरुआ ने किया ध्वजारोहण

पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित पुलिस केंद्र में मुख्य अतिथि राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। समारोह से पहले उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर मंत्री ने कहा कि देश को स्वतंत्रता अनगिनत बलिदानों के बाद मिली है और अब राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है। अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत किसानों को फल उत्पादन के जरिए आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

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