बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव अधिकारियों ने Form-7 के कथित बड़े पैमाने पर दाखिल किए जाने को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबुकुमार ने अधिकारियों से कहा है कि चुनावी फॉर्म में जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए। हालांकि, कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करना जरूरी होगा।
Form-7 को लेकर क्या है विवाद?
Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या मौजूदा सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है। कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान कई जगहों पर बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन दाखिल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ आवेदनों के वास्तविक होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, अगर जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत बयान या घोषणा के साथ Form-6, Form-6A, Form-7 या Form-8 दाखिल किया है, तो उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए पहले Registration of Electors Rules, 1960 के Rule 20 के तहत जांच होगी।
डीके शिवकुमार ने किया था प्रदर्शन
यह निर्देश कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन के बाद आया। शिवकुमार ने बेंगलुरु में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया था। उन्होंने SIR के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन दाखिल कर मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयासों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
रिपोर्टों के अनुसार, शिवकुमार ने चुनाव अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद CEO की ओर से चुनावी फॉर्म में जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। निर्देश जारी होने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
224 विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारियों को निर्देश
CEO वी. अनबुकुमार ने कर्नाटक के सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के संबंधित Electoral Registration Officers (EROs) को निर्देश दिया है कि वे Form-7 समेत संबंधित चुनावी फॉर्म में दाखिल दावों की जांच करें। यदि जांच में गलत जानकारी जानबूझकर दिए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
चुनाव आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल किसी आवेदन की संख्या अधिक होने के आधार पर कार्रवाई नहीं होगी। पहले यह जांचना होगा कि आवेदन में दी गई जानकारी जानबूझकर गलत या फर्जी थी या नहीं।
राजनीतिक आरोपों की भी जांच जरूरी
Form-7 को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए जाने का आरोप लगाया है और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि को लेकर चुनाव आयोग की जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध रिपोर्टों में भी यह स्पष्ट है कि CEO के निर्देश में किसी राजनीतिक दल को इन कथित गलत आवेदनों से सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
अब चुनाव अधिकारियों की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने Form-7 आवेदन नियमों के अनुरूप थे और किन मामलों में जानबूझकर गलत जानकारी देने के आरोप साबित होते हैं।

