सीओ से कथित बदसलूकी पर भड़का प्रशासनिक सेवा संघ, अब आर-पार के मूड में अधिकारी!
-हुरहुरू खासमहल विवाद के बाद झासा की बैठक में बड़ा फैसला, एफआईआर और कार्रवाई की मांग; बात नहीं बनी तो राज्य स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। हुरहुरू के खासमहल जमीन विवाद में प्रशासन और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बीच हुई तीखी बहस का मामला अब सिर्फ मौके के विवाद तक सीमित नहीं रहा है। सदर अंचलाधिकारी आशुतोष कुमार के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ की हजारीबाग इकाई खुलकर सामने आ गई है। संघ ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए साफ कर दिया है कि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।
खासमहल की जमीन पर शुरू हुई कार्रवाई, मौके पर गरमा गया था माहौल
पूरा मामला हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की करीब 50 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। 18 सितंबर को सदर सीओ सह खासमहल पदाधिकारी आशुतोष कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम जेसीबी लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इसी दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव भी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से उनकी तीखी बहस हुई। घटना से संबंधित वीडियो और खबरें सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। प्रशासन का कहना है कि जमीन खासमहल की सरकारी भूमि है और वहां किए गए निर्माण व अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। वहीं, साव पक्ष ने जमीन पर अपने अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
अब अधिकारी संगठन ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ की हजारीबाग इकाई ने बैठक कर पूरे मामले पर चर्चा की। संघ का कहना है कि किसी प्रशासनिक अधिकारी के साथ सरकारी ड्यूटी के दौरान अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल गंभीर विषय है।
बैठक में अंचलाधिकारी की ओर से दिए गए आवेदन पर तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई गई। संघ ने कहा कि आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज हो और मामले में आरोपित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
डीसी से मुलाकात करेगा प्रतिनिधिमंडल, राज्य इकाई भी होगी शामिल
संघ के प्रतिनिधि अब उपायुक्त से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे। इसके साथ ही राज्य स्तरीय इकाई के पदाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल की ओर से अधिकारियों के सामने यह मुद्दा रखा जाएगा कि सरकारी कार्य के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो।
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा मामला
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह रहा कि यदि अंचलाधिकारी के आवेदन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संघ इस मामले को राज्य स्तर पर ले जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
संघ का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मान और सरकारी कार्य के दौरान उनकी सुरक्षा से जुड़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंचलाधिकारी के आवेदन पर प्रशासन और पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई होती है।

