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विभावि के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश, शोध और नवाचार से स्थानीय समस्याओं का समाधान करें विश्वविद्यालय

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार बोले- बड़ी सफलता वह है, जो दूसरों के लिए भी रास्ते खोले; कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने साधनों की पवित्रता पर दिया जोर

अजय निराला | उज्ज्वल दुनिया संवाददाता

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि), हजारीबाग का 11वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बड़ी सफलता वह नहीं है, जो केवल व्यक्ति को आगे बढ़ाए, बल्कि वास्तविक सफलता वह है, जो दूसरों के लिए भी आगे बढ़ने का रास्ता खोले। उन्होंने झारखंड के विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी रेखांकित करते हुए कहा कि शोध और नवाचार के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित किए जाने चाहिए।

दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय परिवार के योगदान की भी सराहना की। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके हाथों में मौजूद उपाधि केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसका वास्तविक मूल्य इस बात से तय होगा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग समाज और देश के हित में किस तरह करते हैं।

डिग्री मिलने के बाद शुरू होती है जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला

राज्यपाल ने आचार्य विनोबा भावे के जीवन और दर्शन के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि डिग्री प्राप्त कर लेने को सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं समझना चाहिए। जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला तो इसके बाद शुरू होती है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी सफलता के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्पों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने में युवाओं की भूमिका केंद्रीय होगी।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शोध और नवाचार पर जोर

झारखंड के विश्वविद्यालयों के दायित्वों पर प्रकाश डालते हुए कुलाधिपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध और नवाचार के जरिए स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने चाहिए। विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान और विचारों को बढ़ावा देना भी होना चाहिए, जिनसे समाज को लाभ मिले।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय से अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान ऐसे विचारशील नागरिक तैयार करे, जो अपने अधिकारों के प्रति सजग और कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे विश्वविद्यालय, झारखंड और देश का नाम रोशन करेंगे।

साध्य की प्राप्ति में साधनों की पवित्रता जरूरी : कुलपति

समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने स्वागत भाषण देने के साथ विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य मानवीय मूल्यों को आत्मसात करते हुए स्वावलंबन के साथ जीवन व्यतीत करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में साधनों की पवित्रता का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।

इस संदर्भ में कुलपति ने तैत्तिरीय उपनिषद और दुष्यंत कुमार की गजल की कुछ पंक्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने माता के सम्मान को सर्वोपरि बताते हुए विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को महत्व देने की सलाह दी।

मात्र दस महीने के अंतराल में दूसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाने का उल्लेख करते हुए कुलपति ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के मार्गदर्शन के लिए आभार जताया।

शैक्षणिक उपलब्धियों और नई पहलों का किया उल्लेख

कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए यूजीसी-जेआरएफ और नेट कोचिंग केंद्र के सफल संचालन, पाठ्यक्रम निर्माण में देशभर के विद्वानों के मार्गदर्शन तथा विभिन्न व्याख्यानों और संगोष्ठियों के आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने महिला शिक्षा के प्रसार के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता भी रेखांकित की।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र को नियमित करने और समय पर परीक्षाएं आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा पर काम करने तथा विद्यार्थियों को ऑनलाइन संसाधनों का लाभ उपलब्ध कराने जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।

कुलपति ने छात्रावास संबंधी सुविधाओं, बालक-बालिका छात्रावासों और बालक छात्रावास को प्रारंभ करने की पहल तथा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत विश्वविद्यालय के मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के रूप में चयन को भी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया।

उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए समारोह के आयोजन में सहयोग देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

21 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 36 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि

दीक्षांत समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार के आगमन के साथ हुई। उनका आगमन पूर्वाह्न 11:30 बजे हुआ। इसके बाद प्रतिमा स्थल पर पुष्प अर्पित किए गए और स्वामी विवेकानंद सभागार में समूह फोटोग्राफी का आयोजन हुआ।

इसके बाद हजारीबाग पुलिस अकादमी के ब्रास बैंड की धुन के साथ शैक्षणिक शोभायात्रा निकाली गई। कुलाधिपति के मंच पर पहुंचने के बाद राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति हुई। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से कुलपति ने राज्यपाल को उत्तरीय और स्मृति चिह्न भेंट किया। इसके बाद दीक्षांत स्मारिका का लोकार्पण किया गया।

समारोह में संकायाध्यक्षों ने अपने-अपने संकाय के विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने के लिए प्रस्तुत किया। इस दौरान कुलाधिपति के हाथों 21 टॉपर विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, नौ विद्यार्थियों को टॉपर प्रमाण पत्र और 36 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

कुलपति द्वारा दीक्षांत समारोह की समाप्ति की घोषणा के बाद शैक्षणिक शोभायात्रा की वापसी हुई।

कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

समारोह में हजारीबाग के पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता और विश्वविद्यालय की प्रथम महिला सरिता शर्मा की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

समारोह के संचालन में कुलसचिव सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के साथ डॉ. सुनील कुमार दुबे और डॉ. आर.जे. तिग्गा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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