गोमिया की सभा में भरी थी हुंकार, छोटानागपुर के इतिहास से जुड़े हैं लौह पुरुष के कई महत्वपूर्ण प्रसंग
जयंती विशेष | उज्ज्वल दुनिया के लिए खास रिपोर्ट
लेखक: प्रो. प्रमोद कुमार
(अवकाश प्राप्त प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग)
हजारीबाग। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हजारीबाग और छोटानागपुर का क्षेत्र राष्ट्रीय आंदोलन की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा था। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ देशभर में असंतोष बढ़ रहा था। स्वतंत्रता संग्राम में आम लोगों की भागीदारी से एकता और राष्ट्रीय चेतना का माहौल मजबूत हो रहा था। इसी दौर में जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने छोटानागपुर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया, तो लोगों में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ।
राष्ट्रीय अखंडता के अग्रदूत और भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल का छोटानागपुर क्षेत्र से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है। उनके दौरे, स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों से संवाद और क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनके विचार आज भी इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंग हैं।
1929 में गोमिया पहुंचे थे सरदार पटेल
सरदार पटेल पहली बार वर्ष 1929 में गोमिया पहुंचे थे। यहां बरवाबेड़ा में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनका मानना था कि जब तक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक देश को आजाद कराने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।
इस सभा को सफल बनाने में स्वतंत्रता सेनानी होपन मांझी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। होपन मांझी का परिवार आज भी उपेक्षा का सामना कर रहा है। उनके पुत्र लक्ष्मण मांझी सक्रिय राजनीति में रहे, लेकिन उनके निधन के बाद परिवार का कोई अन्य सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं रहा।
इसी क्षेत्र के एक अन्य नेता बोंगा मांझी भी कांग्रेस के सक्रिय नेताओं के रूप में उभरे थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। सरदार पटेल की जनसभा में उन्होंने भी संबोधन किया था।
सरदार पटेल को रांची से गोमिया लाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में संविधान सभा के सदस्य और हजारीबाग के प्रथम सांसद बाबू रामनारायण सिंह तथा एकीकृत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय शामिल थे।
1940 में रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन में हुए शामिल
सरदार पटेल का छोटानागपुर क्षेत्र में दूसरा महत्वपूर्ण आगमन मार्च 1940 में हुआ, जब रामगढ़ में कांग्रेस का अधिवेशन आयोजित किया गया था। इस अधिवेशन में मौलाना अबुल कलाम आजाद कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए और सरदार पटेल को कार्यसमिति का सदस्य चुना गया।
अधिवेशन के दौरान सरदार पटेल ने महात्मा गांधी के साथ लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया था। इस अवसर पर आचार्य जे.बी. कृपलानी भी मौजूद थे। रामगढ़ का यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
1946 में हजारीबाग में हुई थी ऐतिहासिक बातचीत
सरदार पटेल वर्ष 1946 में तीसरी बार हजारीबाग आए थे। इस दौरान रामनगर मोहल्ले में एक खपरैल के मकान में उनकी रामगढ़ राज के कामाख्या नारायण सिंह से चुनाव संबंधी मुद्दों पर बातचीत हुई थी। इस ऐतिहासिक वार्ता में बाबू रामनारायण सिंह भी शामिल थे।
लेखक के अनुसार, सरदार पटेल की सलाह पर कामाख्या नारायण सिंह ने कांग्रेस के खिलाफ कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। आज उस खपरैल के मकान की जगह एक विशाल भवन खड़ा है। समय के साथ भौतिक संरचना बदल गई, लेकिन इस स्थान से जुड़ा ऐतिहासिक प्रसंग क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छोटानागपुर के मुद्दों पर भी रखते थे नजर
सरदार पटेल के पत्राचार से भी छोटानागपुर क्षेत्र की समस्याओं के प्रति उनकी गंभीरता का पता चलता है। प्रख्यात लेखक वी. शंकर द्वारा संपादित पुस्तक ‘सरदार पटेल: चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950)’ के पहले और दूसरे खंड में क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों की चर्चा की गई है।
इनमें राजखरसावां और सरायकेला को तत्कालीन उड़ीसा प्रांत में मिलाने से संबंधित पत्राचार भी शामिल है। लेखक के अनुसार, सरदार पटेल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। पुस्तक के पृष्ठ 659 पर इस विषय का उल्लेख मिलता है। बताया गया है कि 29 मई 1948 को सरदार पटेल ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर अपनी राय से अवगत कराया था।
मुनाफाखोरी के मामले में भी लिया था संज्ञान
रांची से प्रकाशित समाचार पत्र फ्री प्रेस जर्नल में 16 अक्टूबर 1947 को ‘सीरे में मुनाफाखोरी’ शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई थी। इसमें मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्यों पर सवाल उठाए गए थे।
लेख के अनुसार, इस खबर पर संज्ञान लेते हुए सरदार पटेल ने 2 नवंबर 1947 को बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने सरकार की ओर से इस मामले में सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता जताई थी।
यह प्रसंग बताता है कि सरदार पटेल प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को भी गंभीरता से लेते थे।
जरीना हाउस में हुई थी महत्वपूर्ण बैठक
बहुत कम लोगों को जानकारी है कि सरदार पटेल, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह और बिहार के तत्कालीन प्रथम पुलिस महानिरीक्षक हमीद साहब एक महत्वपूर्ण बातचीत के सिलसिले में हजारीबाग के दीपूगढ़ा स्थित जरीना हाउस में एकत्र हुए थे।
छोटानागपुर क्षेत्र में सरदार पटेल के भ्रमण और बैठकों से जुड़ी कई जानकारियां आज भी अलग-अलग दस्तावेजों और ऐतिहासिक स्रोतों में बिखरी हुई हैं। इन तथ्यों को एकत्रित कर व्यवस्थित रूप से सामने लाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।
इंद्रपुरी चौक पर स्थापित है सरदार पटेल की प्रतिमा
हजारीबाग के इंद्रपुरी चौक पर सरदार वल्लभभाई पटेल की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। 4 अगस्त 2007 को झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने इसका अनावरण किया था।
सरदार पटेल और हजारीबाग के बीच रहे ऐतिहासिक संबंधों पर व्यापक शोध की आवश्यकता है। उनके दौरों, स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े पत्राचार का संकलन इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने ला सकता है।
सरदार पटेल केवल स्वतंत्र भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक ही नहीं थे, बल्कि उनका जीवन राष्ट्रसेवा, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकजुटता की प्रेरणा भी देता है। उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
— प्रो. प्रमोद कुमार
अवकाश प्राप्त प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग
विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग


