लखनऊ: उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नकली लहसुन और मिलावटी काली मिर्च से लेकर संदिग्ध खाद्य तेल, दूषित सॉस, मिलावटी दूध, पनीर और खोया तक के मामले जांच के दौरान सामने आए हैं। मिठाइयों में भी मिलावट की शिकायतें और कार्रवाई के मामले सामने आए हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की ओर से कई जिलों में छापेमारी और जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त करने के साथ कई जगहों पर उसे नष्ट भी कराया गया है।
गाजियाबाद में गोंद और मैदा से तैयार की जा रही थी नकली काली मिर्च
गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर इलाके में एक कथित अवैध फैक्ट्री में नकली काली मिर्च तैयार किए जाने का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मैदा, गोंद और रिफाइंड सोयाबीन तेल जैसी सामग्री का इस्तेमाल कर काली मिर्च जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था।
खाद्य विभाग की कार्रवाई में करीब 13.34 लाख रुपये की सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई। कुछ मामलों में काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज या अन्य पदार्थ मिलाए जाने की भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
काली मिर्च खरीदते समय क्या ध्यान रखें?
सिर्फ घरेलू टेस्ट के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को सुरक्षित या असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। काली मिर्च में मिलावट की पुष्टि के लिए खाद्य प्रयोगशाला की जांच सबसे भरोसेमंद तरीका है। इसलिए संदिग्ध उत्पाद मिलने पर उसका सेवन करने के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करना बेहतर है।
नकली लहसुन का मामला भी आया सामने
उत्तर प्रदेश में नकली लहसुन को लेकर भी कार्रवाई के मामले सामने आए हैं। कुछ जगहों पर असली लहसुन में अन्य पदार्थ मिलाकर बेचने की शिकायतें सामने आई हैं। सोशल मीडिया और बाजार में सीमेंट से नकली लहसुन बनाने के दावे भी सामने आते रहे हैं, हालांकि किसी विशेष उत्पाद को नकली साबित करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
उपभोक्ताओं को बेहद चमकदार, असामान्य आकार या असामान्य गंध वाले लहसुन को लेकर सतर्क रहना चाहिए। किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री को केवल घरेलू जांच के आधार पर खाने योग्य मानना उचित नहीं है।
प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन की जब्ती
लखनऊ में बिहार से दिल्ली जा रही ट्रेन से करीब 450 किलोग्राम प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन जब्त किए जाने का मामला भी सामने आया। भारत में चाइनीज लहसुन के आयात पर प्रतिबंध के बावजूद इसकी अवैध तस्करी की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
चाइनीज लहसुन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी कई दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी खेप में रसायन या फंगस की मौजूदगी की पुष्टि केवल वैज्ञानिक जांच से ही की जा सकती है। इसलिए बिना आधिकारिक रिपोर्ट के किसी विशेष रसायन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
जिंजर-गारलिक पेस्ट पर भी उठे सवाल
पैकेट बंद जिंजर-गारलिक पेस्ट में मिलावट के मामले भी सामने आए हैं। कुछ स्थानीय उत्पादों में वजन या गाढ़ापन बढ़ाने के लिए अलग-अलग पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।
ऐसे उत्पाद खरीदते समय उपभोक्ताओं को लेबल, मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
हजारों लीटर संदिग्ध खाद्य तेल और सॉस जब्त
खाद्य तेल और सॉस में भी मिलावट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई जिलों में कार्रवाई की है। हापुड़ समेत कुछ स्थानों पर बड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य तेल जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं, कानपुर में कथित तौर पर गंदगी के बीच और बिना उचित लेबल के तैयार किए जा रहे सॉस की फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करते हुए 1,000 लीटर से अधिक संदिग्ध सॉस जब्त कर नष्ट किए जाने का मामला सामने आया।
दूध, पनीर और खोया भी जांच के घेरे में
डेयरी उत्पादों में मिलावट को लेकर भी खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई जारी है। दूध, पनीर और खोया यानी मावा के कई नमूनों की जांच की गई है। आगरा, मथुरा, मेरठ, कानपुर और गाजियाबाद समेत कई जिलों में मिलावटी दूध और संदिग्ध डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई के मामले सामने आए हैं।
त्योहारों के सीजन में खोया, पनीर और दूध से बनी मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और सैंपलिंग पर खास जोर रहता है।
मिलावटी पनीर से तैयार किए जा रहे थे छेना रसगुल्ले
गाजियाबाद के बिहारीपुरा इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक गोदाम पर छापेमारी कर करीब 10 क्विंटल तैयार छेना रसगुल्ला जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, इन रसगुल्लों को मिलावटी पनीर और कुछ रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल कर तैयार किया जा रहा था। जब्त सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जाने और कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई।
मिलावट से बचने के लिए उपभोक्ता क्या करें?
खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल कम कीमत या आकर्षक पैकेजिंग देखकर भरोसा न करें। पैकेट बंद उत्पादों पर FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन नंबर, सामग्री, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख जरूर जांचें।
यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसका सेवन न करें और संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें। किसी भी घरेलू जांच को अंतिम प्रमाण न मानें, क्योंकि मिलावट की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होता है।

