-खान सुरक्षा नियमों की अनदेखी के बलीवेदी पर चढ़ा कर्मी, हादसे के बाद खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
अजय निराला/ उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित एनटीपीसी के एमडीओ कंपनी त्रिवेणी सैनिक के खदान में मंगलवार सुबह हुए हादसे में कंपनी के सुपरवाइजर विभूति साहू (35) की मौत हो गई। घटना माइंस के मिड स्केल सेक्टर में हुई। विभूति साहू मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार खदान में काम के दौरान विभूति साहू एक वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी गई है।
हादसे के बाद सुरक्षा मानकों पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद माइंस परिसर में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर कार्यस्थल पर भारी वाहनों की आवागमन, पैदल चलने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, मालवाहकों से सुरक्षित दूरी और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या किसी विशेष स्तर पर लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे की परिस्थितियों और माइंस में लागू सुरक्षा व्यवस्था की जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूनियन ने प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप
सुपरवाइजर की मौत के बाद राष्ट्रीय कोयला मजदूर यूनियन के एनएमएल जोनल सचिव मोहम्मद जहूर ने एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। यूनियन ने हादसे की डीजीएमएस से जांच कराने की मांग की है। यूनियन ने मृतक के परिवार को दो करोड़ रुपये मुआवजा देने, आश्रित को तत्काल नौकरी देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
प्रबंधन ने कहा- नौकरी और मुआवजे पर बातचीत जारी
त्रिवेणी सैनिक लिमिटेड के अधिकारी उत्तम झा ने घटना की जानकारी मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल बाहर हैं, इसलिए हादसे के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार को नौकरी और मुआवजे को लेकर प्रबंधन स्तर पर बातचीत चल रही है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की चूक हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

