HomeNationalTMC सिंबल फ्रीज होने पर ममता बनर्जी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, 21 सितंबर...

TMC सिंबल फ्रीज होने पर ममता बनर्जी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट, 21 सितंबर को सुनवाई की संभावना

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के चुनाव आयोग (ECI) के अंतरिम आदेश के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने TMC में आंतरिक विवाद के बीच 17 सितंबर को पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को अंतिम विवाद निपटने तक फ्रीज करने का फैसला किया था। आयोग के मुताबिक, दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव को देखते हुए दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की गई है।

21 सितंबर को सुनवाई संभव

ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार 21 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किए जाने की संभावना है।

दोनों गुटों को मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह

ECI के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। ये व्यवस्थाएं मौजूदा उपचुनाव के लिए हैं और मूल TMC नाम तथा आरक्षित चिन्ह पर अंतिम फैसला अलग से होना है।

क्यों फ्रीज किया गया TMC का नाम और सिंबल?

चुनाव आयोग ने कहा कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं, जो संगठन के नियंत्रण और मूल पार्टी पहचान पर दावा कर रहे हैं। आयोग ने चुनाव चिन्ह आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत अंतरिम व्यवस्था करते हुए दोनों गुटों को अलग नाम और मुक्त चुनाव चिन्ह चुनने का विकल्प दिया। इसका उद्देश्य उपचुनाव के दौरान दोनों पक्षों की अलग पहचान सुनिश्चित करना है।

ममता बनर्जी ने ECI के फैसले पर क्या कहा?

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने अपने सार्वजनिक बयानों में फैसले को लोकतंत्र के लिए गंभीर कदम बताया और आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की पहचान को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। ये उनके राजनीतिक आरोप और दावे हैं; इन पर चुनाव आयोग या अन्य पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

नंदीग्राम उपचुनाव का भी जुड़ा है मामला

यह विवाद पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ने की अनुमति दी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments