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टीएमसी के बागी सांसदों को 22 सितंबर तक मोहलत, अयोग्यता मामले में स्पीकर ने बढ़ाया जवाब का समय

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर एनसीपीआई के साथ जाने वाले 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रही अयोग्यता की कार्रवाई में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अब इन सांसदों को 22 सितंबर तक लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष जवाब दाखिल करना होगा।

दरअसल, टीएमसी ने इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के पास याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद 26 अगस्त को सांसदों को नोटिस जारी किए गए थे और सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था। हालांकि, बागी सांसदों ने जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।

संसद से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अब एनसीपीआई से जुड़े सांसद 22 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। अतिरिक्त समय मिलने से बागी खेमे को अपने कानूनी और राजनीतिक पक्ष को तैयार करने का अवसर मिल गया है। माना जा रहा है कि सांसद यह समझने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं कि उनके मामले में दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान किस तरह लागू होंगे।

यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर पैदा हुए राजनीतिक संकट से जुड़ा है। चुनाव में पार्टी को झटका लगने के बाद जून में टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होने और एनसीपीआई नाम के संगठन के साथ जाने का फैसला किया था। इसके बाद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।

मामले में उस समय तेजी आई जब सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित अयोग्यता की कार्यवाही को तेजी से पूरा करने का निर्देश भी दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसदों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया। हालांकि, बागी सांसदों ने निर्धारित सात दिनों की समय सीमा बढ़ाने की मांग की। अब उन्हें 22 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

इस राजनीतिक विवाद के बीच बागी सांसदों ने एनडीए के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया है। इससे टीएमसी और बागी खेमे के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। टीएमसी की ओर से जहां इन सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की जा रही है, वहीं बागी सांसद अपने राजनीतिक फैसले के पक्ष में कानूनी आधार तलाश रहे हैं।

अब सबकी नजर 22 सितंबर पर टिकी है। उस दिन बागी सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद यह तय होगा कि अयोग्यता की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। मामला संसद की सदस्यता, दल-बदल विरोधी कानून और पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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