कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 1 नवंबर को ठाकुरनगर स्थित ठाकुरबाड़ी का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका ठाकुरनगर ठाकुरबाड़ी का पहला दौरा होगा। इस दौरान वह अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके दौरे को मतुआ समुदाय के लिहाज से राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की मातृसेना की अध्यक्ष सोमा ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी दी। उनके मुताबिक, 1 नवंबर से ठाकुरनगर में दूसरे अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन की शुरुआत होगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शामिल होंगे।
मतुआ समुदाय को क्या संदेश देंगे मुख्यमंत्री?
शुभेंदु अधिकारी के दौरे के दौरान मतुआ समुदाय की नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सबकी नजर रहेगी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदन करने वाले लोगों को प्रमाणपत्र मिलने की प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नामों को लेकर पैदा हुई चिंताएं इस क्षेत्र में अहम मुद्दे हैं।
मतुआ समुदाय के कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने या उनके मामलों के लंबित रहने की खबरों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री इन विषयों पर क्या संदेश देते हैं।
मतुआ समुदाय के बीच राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश
उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर स्थित ठाकुरबाड़ी मतुआ महासंघ का प्रमुख केंद्र है। यह स्थान धार्मिक और सामाजिक महत्व के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाता है।
मतुआ समुदाय का प्रभाव राज्य की कई विधानसभा सीटों पर माना जाता है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दल इस समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करते रहे हैं। भाजपा के लिए भी मतुआ समुदाय का समर्थन महत्वपूर्ण रहा है।
नागरिकता और विकास पर रहेंगी निगाहें
भारत-बांग्लादेश सीमा के नजदीक स्थित इस क्षेत्र में नागरिकता के साथ स्थानीय विकास भी प्रमुख मुद्दा है। मतुआ समुदाय के लोग लंबे समय से नागरिकता संबंधी प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर अपनी अपेक्षाएं रखते आए हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान इन मुद्दों पर सरकार के रुख और संभावित घोषणाओं को लेकर लोगों की निगाहें रहेंगी। हालांकि, कार्यक्रम में किसी नई घोषणा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शुभेंदु अधिकारी का यह दौरा मतुआ समुदाय के साथ सरकार के संवाद और क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

