बेलग्रेड: यूरोपीय देश सर्बिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। छात्र आंदोलन से निकली ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की सत्तारूढ़ पार्टी को करारी शिकस्त दी है। इस जीत के साथ ही सर्बियाई राजनीति में करीब 14 वर्षों से कायम वुचिच और उनकी पार्टी के वर्चस्व को बड़ा झटका लगा है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजधानी बेलग्रेड समेत कई शहरों में समर्थकों ने जश्न मनाया।
प्रारंभिक चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, स्टूडेंट लिस्ट को 250 सदस्यीय संसद में लगभग 139 सीटें मिलीं, जबकि वुचिच की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 97 सीटें मिलीं। इस नतीजे को सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद हुई थी। स्टेशन की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
शुरुआत में छात्रों ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने और पारदर्शी जांच की मांग की। धीरे-धीरे यह आंदोलन विश्वविद्यालयों से निकलकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में बदल गया। इसमें युवाओं के साथ समाज के अन्य वर्गों ने भी हिस्सा लिया।
करीब दो वर्षों तक चले आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, संस्थानों की जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई। आखिरकार छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों ने चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला किया।
पारंपरिक विपक्ष से अलग बनाई पहचान
स्टूडेंट लिस्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग स्वरूप रहा। इस सूची को छात्र संगठनों के समर्थन से तैयार किया गया, लेकिन इसके उम्मीदवार केवल छात्र नहीं थे। इसमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, पेशेवरों, कलाकारों और किसानों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को जगह मिली।
इस आंदोलन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, कानून का शासन, स्वतंत्र मीडिया और सरकारी संस्थानों में सुधार को प्रमुख मुद्दा बनाया। इससे उन मतदाताओं को भी एक साझा मंच मिला, जो लंबे समय से राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव चाहते थे।
स्टूडेंट लिस्ट की जीत ने यह भी दिखाया कि एक जन आंदोलन चुनावी राजनीति में उतरकर स्थापित राजनीतिक ताकतों को चुनौती दे सकता है।
वुचिच के सामने क्यों बढ़ी चुनौती?
अलेक्जेंडर वुचिच और उनकी पार्टी वर्ष 2012 से सर्बिया की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। वुचिच प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनकी सरकार ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और सड़क-रेल परियोजनाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश किया।
हालांकि, उनके विरोधियों ने सरकार पर सत्ता के केंद्रीकरण, मीडिया पर प्रभाव और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर लगातार सवाल उठाए। नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे के बाद इन मुद्दों पर असंतोष और गहरा गया।
वुचिच ने चुनाव में अपनी पार्टी की हार स्वीकार की। इसके बाद छात्र समर्थित आंदोलन के समर्थकों ने इसे लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की शुरुआत बताया।
जीत के बाद भी आसान नहीं होगी राह
ऐतिहासिक चुनावी जीत के बावजूद स्टूडेंट लिस्ट के सामने कई कठिन चुनौतियां हैं। आंदोलन को अब विरोध प्रदर्शन से आगे बढ़कर सरकार चलाने और ठोस नीतियां लागू करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच, सरकारी संस्थानों में सुधार और कानून के शासन को मजबूत करना है। इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव, मीडिया की स्वतंत्रता और जनता की बढ़ती उम्मीदों पर खरा उतरना भी नई राजनीतिक ताकत के लिए अहम होगा।
विदेश नीति भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सर्बिया लंबे समय से यूरोपीय संघ, रूस और चीन के साथ संतुलन बनाकर चलने की कोशिश करता रहा है। नई सरकार को यह तय करना होगा कि घरेलू सुधारों के साथ इन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
सर्बिया की राजनीति में नए दौर की शुरुआत?
छात्र आंदोलन की जीत ने सर्बिया में राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं को मजबूत किया है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। चुनावी जीत को स्थायी संस्थागत सुधार में बदलना, भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाना और विभिन्न विचारों वाले समर्थकों को एक साथ बनाए रखना आसान नहीं होगा।
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि स्टूडेंट लिस्ट जनता की उम्मीदों को कितना पूरा कर पाती है और क्या सर्बिया में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के अपने वादों को जमीन पर उतार पाती है।

