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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बोकारो थर्मल में किये 370 करोड़ रुपए लागत से बने एफजीडी प्लांट का ऑनलाइन उदघाटन

बोकारो थर्मल : डीविसी की 500 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाले ए प्लांट में कोयला से सल्फर को अलग करने को लेकर बनाये गये (प्रदूषण नियंत्रक प्लांट) एफजीडी प्लांट का ऑन लाइन उद्घाटन शुक्रवार को देश के पीएम नरेंद्र मोदी अपने झारखंड दौरा के क्रम में धनबाद आगमन पर ऑन लाईन उदघाटन किए ।  उद्घाटन को लेकर डीविसी की बोकारो थर्मल प्लांट में पूरी तैयारी की गई थी एवम समारोह आयोजित की गई थी । प्लांट में कार्यरत अधिकारियों ए कामगारों में भी काफी उत्साह देखा गया । इस फ्लू गैस डी सलफाराइजेसन ( एफजीडी )प्लांट का निर्माण में लगभग 370 करोड़ रु की लागत लगी थी। जिसे पूरा करने में लगभन 03 वर्ष लगे है। निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 2021 के अप्रैल माह में शुरुवात की गयी थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार अपराह्न बारह बजकर दो मिनट पर उदघाटन किया. उदघाटन के दौरान डीवीसी एवं निर्माण कार्य करनेवाली कोलकाता की कंपनी टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग कंपनी प्रालि तथा नार्थ कोरिया की कंपनी केसी कॉटरेल इंडिया के सभी अधिकारी, अभियंता व कामगारों ने ताली बजाकर स्वागत किया ।  उदघाटन के पूर्व प्लांट में आयोजित कार्यक्रम का दीप जलाकर उदघाटन कोलकाता के इडी फ्युल तरुण कुमार, वरीय महाप्रबंधक सह परियोजन प्रधान आनंद मोहन प्रसाद, कोडरमा के एचओपी दिलीप कुमार सिंह, चंद्रपुरा के एचओपी मनोज कुमार ठाकुर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान एफजीडी के वरीय महाप्रबंधक एसएन प्रसाद, जीएम ओएंडएम एस भट्टाचार्य, जीएम कॉमन सर्विसेज एस भद्रा, टेक्नो कंपनी के आरसी अग्रवाल, सव्यसाची चौधरी, अमरेश चौधरी, उपानंदा दास, केसी कॉटरेल के चू हूनसांग, हवान इनसूंग, शीन सूजी,डिप्टी प्रेसिडेंट सुदीप भट्टाचार्य उपस्थित थे। स्वागत भाषण परियोजना प्रधान आनंद मोहन प्रसाद ने देते हुए कहा की डीवीसी के स्वर्णिम इतिहास में अत्यधिक खुशी का पल कहा कि इडी फ्यूल ने कहा कि एफजीडी प्लांट का निर्माण हो जाने के बाद कोयला में जो सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा रहती है और उससे जो उत्सर्जन होता है, उससे मानव स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच सकता है और पर्यावरण को भी खराब करता है। कहा कि भारतीय कोयले में सल्फर की मात्रा 0.25 से 0.5 तक होती है और आयातित कोयले में यह 0.6 से अधिक होती है. एसओटू के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप अम्लीय वर्षा होत है । कहा कि एफजीडी प्लांट निर्माण से ना सिर्फ कोयला से एसओटू को अलग किया जा सकेगा बल्कि इससे जिप्सम का भी निर्माण होगा जिसका उपयोग सीमेंट के निर्माण सहित कई प्रकार के उपयोगों में किया जा सकेगा।
 7 दिसंबर 2015 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए सख्त पर्यावरण मानकों की शुरुआत की थी, जिसके तहत एसओटू के मानक को 100एमजी तक रखना था और उसको पूरा करने के लिए एफजीडी का निर्माण किया गया। बताया कि एफजीडी प्लांट में प्रतिदिन 192 एमटी लाईम स्टोन की खपत होगी जिससे 336 एमटी जिप्सम निकलेगा. कहा कि जिप्सम का उपयोग को लेकर काफी व्यापक बाजार है।इस अवसर पर बोकारो थर्मल थाना प्रभारी सैलेंद्र कुमार सिंह, एसबीआई बोकारो थर्मल शाखा प्रबंधक सुभाष कुमार, एचआर सुनिल कुमार महतो, नदीम अख़्तर, शाहिद अकरम, रामलाल पासवान, बालेश्वर यादव आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे.
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