नई दिल्ली/रांची: झारखंड कैडर की IAS अधिकारी पूजा सिंघल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने रांची की विशेष PMLA अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग वाली पूजा सिंघल की याचिका पर राहत नहीं दी।
किस मामले में दायर की गई थी याचिका?
पूजा सिंघल ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष PMLA अदालत, रांची के 19 जुलाई 2022 के संज्ञान आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला मनरेगा के क्रियान्वयन में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच के दौरान सामने आया था।
सिंघल की ओर से दलील दी गई थी कि उनके खिलाफ PMLA की धाराओं के तहत संज्ञान लेने से पहले तत्कालीन सरकारी अधिकारी के तौर पर CrPC की धारा 197 के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने पूजा सिंघल की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन कथित कृत्यों को व्यक्तिगत अवैध कृत्य के रूप में देखा जा रहा है, उनके लिए अभियोजन से पहले धारा 197 के तहत पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मंजूरी से संबंधित सवाल ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है।
इसके बाद पूजा सिंघल ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग में हस्तक्षेप नहीं किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह संकेत दिया कि धारा 197 के तहत मंजूरी का सवाल कथित कृत्यों के आधिकारिक कर्तव्य से संबंध सहित अन्य तथ्यों पर निर्भर कर सकता है।
2022 में हुई थी गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूजा सिंघल को मई 2022 में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान कई परिसरों में तलाशी की गई थी। ED के दस्तावेज के अनुसार, जांच के दौरान 19.76 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जाने का उल्लेख है। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि बरामद धन के स्रोत का संतोषजनक कानूनी हिसाब नहीं दिया गया।
हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप और जांच एजेंसी के दावे को अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पूजा सिंघल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। निचली अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने पक्ष रखेंगे और मामले का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों एवं कानून के आधार पर होगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका में हस्तक्षेप नहीं करने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी ठहरा दिया है। मामले में आरोपों की न्यायिक जांच अभी जारी है।

