लोहरदगा: झारखंड के लोहरदगा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार और पूरे गांव को हैरान कर दिया। कुटमू की रहने वाली डफली उरांव करीब सात साल पहले लापता हो गई थीं। काफी तलाश के बाद परिवार ने एक अज्ञात महिला के शव के कपड़ों के आधार पर उनकी पहचान कर ली और उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार भी कर दिया। लेकिन सात साल बाद डफली उरांव अचानक जीवित अपने घर लौट आईं।
2019 में घर से लापता हुई थीं डफली उरांव
जानकारी के अनुसार, डफली उरांव वर्ष 2019 में अचानक घर से लापता हो गई थीं। परिजनों ने उनकी काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई।
कुछ समय बाद परिवार को जानकारी मिली कि कुड़ू इलाके में एक अज्ञात महिला का शव मिला है। पुलिस ने परिवार के लोगों को महिला के कपड़े दिखाए। कपड़े डफली के कपड़ों से मिलते-जुलते थे। परिवार ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान डफली के रूप में कर ली।
परिजनों के अनुसार, शव की हालत खराब होने की बात बताते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार भी यह मानकर बैठ गया कि डफली अब इस दुनिया में नहीं हैं।
सात साल बाद महाराष्ट्र से आई खबर
सात साल तक परिवार डफली को मृत समझता रहा। इसी दौरान हाल में उन्हें जानकारी मिली कि डफली महाराष्ट्र में हैं और एक संस्था उन्हें लोहरदगा लेकर आ रही है।
इसके बाद श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन के सदस्य डफली उरांव को लेकर शुक्रवार को लोहरदगा पहुंचे और उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया।
संस्था के अनुसार, वर्ष 2022 में डफली ओडिशा के मिशन आसरा के संपर्क में आई थीं। वहां उनकी देखभाल और इलाज कराया गया। बाद में उन्हें श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन को सौंपा गया। इलाज और देखभाल के दौरान डफली ने अपने घर का पता लोहरदगा के कुटमू के रूप में बताया। इसके बाद संस्था ने उनके परिवार की तलाश की।
बेटी को जिंदा देखकर परिवार की आंखों में आ गए आंसू
जब डफली अपने घर पहुंचीं तो परिवार के लोगों ने उन्हें देखते ही पहचान लिया। सात साल बाद अपनी बेटी को जिंदा देखकर परिजन भावुक हो गए। जिस परिवार ने वर्षों पहले डफली को मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था, उसी घर में अचानक खुशी का माहौल बन गया।
डफली के लापता होने के बाद उनके पति की भी मौत हो चुकी है। ऐसे में सात साल बाद उनकी वापसी परिवार के लिए खुशी के साथ-साथ बीते वर्षों की दर्दनाक यादें भी लेकर आई है।
कपड़ों के आधार पर पहचान पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में परिवार ने उस समय हुई पहचान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि अज्ञात शव की पहचान की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट तरीके से पूरी की जाती और शव को दिखाकर पुष्टि कराई जाती, तो शायद परिवार को सात साल तक यह गलतफहमी नहीं रहती कि डफली की मौत हो चुकी है।
फिलहाल, सात साल बाद डफली उरांव की घर वापसी लोहरदगा में चर्चा का विषय बनी हुई है।

