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₹5,000 के धनुष से एशियन गेम्स गोल्ड तक पहुंची कीर्ति शर्मा, दादा के गले में पहनाया मेडल; रिटौली में हुआ भव्य स्वागत

जींद: कभी जिस बेटी के पास तीरंदाजी के लिए महज ₹5,000 का लकड़ी का धनुष था, आज उसी कीर्ति शर्मा ने एशियन गेम्स में भारत का नाम रोशन कर दिया है। हरियाणा के जींद जिले के रिटौली गांव की रहने वाली कीर्ति शर्मा ने भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम के साथ ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। जापान से गोल्ड मेडल लेकर जब कीर्ति अपने गांव पहुंचीं तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और आतिशबाजी के साथ अपनी बेटी का जोरदार स्वागत किया।

सबसे भावुक पल उस वक्त आया, जब घर पहुंचकर कीर्ति ने अपना एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल दादा के गले में पहनाया। दादा ने पोती की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि उसने पूरे परिवार और गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

₹5,000 के लकड़ी के धनुष से शुरू हुआ सफर

कीर्ति शर्मा की सफलता की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगे खेल उपकरण आसानी से खरीदे जा सकें। जब कीर्ति ने तीरंदाजी की शुरुआत की, तब परिवार ने उधार पैसे लेकर करीब ₹5,000 का लकड़ी का धनुष खरीदा था।

धीरे-धीरे कीर्ति की प्रतिभा सामने आने लगी और उन्होंने तीरंदाजी को अपना जुनून बना लिया। बाद में बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें महंगा प्रोफेशनल धनुष भी दिलाना पड़ा। इसके लिए उनके किसान पिता विजय कुमार ने कर्ज तक लिया। परिवार के संघर्ष और बेटी के सपने में भरोसे ने कीर्ति को लगातार आगे बढ़ाया।

शुरुआत में शरीर कमजोर होने के कारण नहीं हुआ था चयन

कीर्ति का सफर शुरू से आसान नहीं था। जब कोच ऊधम सिंह गांव में बच्चों का चयन करने पहुंचे थे, तब कीर्ति को उनके कमजोर और पतले शरीर के कारण शुरुआत में तीरंदाजी के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था।

लेकिन कीर्ति ने हार नहीं मानी। कुछ समय बाद जब कोच दोबारा गांव पहुंचे तो उन्हें दूसरा मौका मिला। इसके बाद उनकी शारीरिक क्षमता, कंधों की ताकत और धनुष चलाने की तकनीक पर विशेष मेहनत की गई।

बाद में कीर्ति का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के हजारीबाग केंद्र के लिए हुआ, जहां उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा। पोषण विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों की मदद से उनकी फिटनेस और ताकत पर भी काम किया गया।

पिता ने कर्ज लेकर खरीदा महंगा धनुष

कीर्ति के पिता विजय कुमार खेती करते हैं और परिवार के पास करीब तीन एकड़ जमीन है। बेटी के खेल को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उसका साथ नहीं छोड़ा।

कीर्ति के बेहतर प्रदर्शन के बाद जब प्रोफेशनल धनुष की जरूरत पड़ी तो पिता ने कर्ज लेकर उसके लिए महंगा धनुष खरीदा। परिवार के लिए यह आसान फैसला नहीं था, लेकिन उन्हें भरोसा था कि बेटी मेहनत के दम पर एक दिन बड़ा मुकाम हासिल करेगी।

आज कीर्ति का एशियन गेम्स गोल्ड उसी संघर्ष और भरोसे का परिणाम है।

दक्षिण कोरिया को हराकर रचा इतिहास

2026 एशियन गेम्स में भारतीय महिला रिकर्व टीम ने इतिहास रच दिया। अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोद की भारतीय टीम ने फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इस जीत के साथ भारत ने महिला टीम रिकर्व स्पर्धा में एशियन गेम्स का अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय टीम की इस जीत ने दक्षिण कोरिया के लंबे दबदबे को भी समाप्त किया।

रिटौली पहुंची तो बेटी के स्वागत में उमड़ा पूरा गांव

गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब कीर्ति सोमवार को अपने गांव रिटौली पहुंचीं तो पूरा गांव उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। जामनी बस अड्डे पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक पहले से मौजूद थे।

कीर्ति की गाड़ी पहुंचते ही उनकी मां गुड्डी देवी ने बेटी को गले लगा लिया। मां ने अपने हाथों से बेटी को चूरमा खिलाया। इसके बाद फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के बीच कीर्ति को गांव ले जाया गया। ग्रामीणों ने जगह-जगह फूल बरसाकर अपनी लाडली बेटी का स्वागत किया।

दादा के गले में पहनाया गोल्ड मेडल

गांव पहुंचने के बाद कीर्ति ने अपना स्वर्ण पदक दादा के गले में पहनाया। दादा रामभज/रामजुआरी ने पोती की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें अपनी पोती पर गर्व है।

परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था। जिस बच्ची को कभी तीरंदाजी के लिए आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, वही आज एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक लेकर अपने घर लौटी थी।

अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना

कीर्ति शर्मा का कहना है कि एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके सफर का अंत नहीं है। उनका अगला बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

कीर्ति ने अपने परिवार, प्रशिक्षकों और गांव के लोगों को अपनी सफलता का श्रेय दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों, खासकर बेटियों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।

गांव की बेटी से देश की गोल्डन गर्ल तक

कीर्ति शर्मा की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस परिवार की कहानी है जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपने पर भरोसा किया। ₹5,000 के शुरुआती धनुष से शुरू हुआ सफर एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक तक पहुंचा।

आज रिटौली की गलियों में कीर्ति का नाम गर्व से लिया जा रहा है। उनकी जीत ने यह संदेश भी दिया है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा को रोक नहीं सकती, अगर मेहनत, परिवार का साथ और लक्ष्य के प्रति जुनून मजबूत हो।

कीर्ति शर्मा की उपलब्धि एक नजर में

  • नाम: कीर्ति शर्मा
  • गांव: रिटौली, जींद, हरियाणा
  • खेल: रिकर्व तीरंदाजी
  • एशियन गेम्स: 2026
  • पदक: स्वर्ण
  • स्पर्धा: महिला टीम रिकर्व
  • भारतीय टीम: अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोद
  • फाइनल में प्रतिद्वंद्वी: दक्षिण कोरिया
  • शुरुआती धनुष: करीब ₹5,000 का लकड़ी का धनुष
  • अगला लक्ष्य: ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक
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