नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे नेतृत्वहीन और दिशाहीन करार दिया है। नई दिल्ली में ETV भारत को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में दो अलग-अलग तरह के रुझान दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी एक तरफ मुस्लिम लीग जैसी राजनीति की ओर बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ उग्र वामपंथी विचारधारा की तरफ झुक रही है।
रिजिजू ने कहा कि सही नेतृत्व के अभाव में मुख्य विपक्षी दल का रवैया नकारात्मक होता जा रहा है। उनके मुताबिक, कांग्रेस के भीतर दो अलग-अलग राजनीतिक चरित्र विकसित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कई मुद्दों पर उग्र वामपंथी रुख अपना रही है और साथ ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से अपने संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का भी समर्थन किया। रिजिजू का कहना है कि वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी चुनौती अब केवल हथियार उठाने वाले समूहों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, सशस्त्र वामपंथी उग्रवाद काफी हद तक कमजोर हुआ है, लेकिन उससे जुड़ी विचारधारा अभी भी शहरी क्षेत्रों के एक वर्ग में मौजूद है।
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी मौजूदा परिस्थितियों में महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि हथियार उठाने वाले उग्रवादियों की संख्या और प्रभाव में काफी कमी आई है, लेकिन उनकी विचारधारा से प्रभावित लोग अभी भी समाज में मौजूद हैं। उन्होंने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बताते हुए इससे वैचारिक स्तर पर भी मुकाबला करने की जरूरत बताई।
उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयान का भी उल्लेख किया। रिजिजू ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद को पहले भी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता रहा है और यह केवल किसी एक राजनीतिक दल की चिंता नहीं है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी रिजिजू ने सरकार और पुलिस का बचाव किया। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया था। उनका कहना था कि छात्रों को लंबे समय तक प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई, लेकिन जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
रिजिजू ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन 30 दिनों से अधिक समय तक शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा। उनके मुताबिक, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तब पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को छात्रों की शिकायतों को दबाने के प्रयास के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
पूर्वोत्तर के मुद्दे पर बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों की विकास और बेहतर भविष्य को लेकर समान आकांक्षाएं हैं। उन्होंने माना कि पूर्वोत्तर के कई हिस्से लंबे समय तक विकास की दौड़ में पीछे रहे। इसके लिए उन्होंने पिछली केंद्र सरकारों की कथित उपेक्षा और दिल्ली से दूरी वाली सोच को जिम्मेदार ठहराया। रिजिजू के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों में पूर्वोत्तर को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों के बीच जारी सीमा विवादों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। रिजिजू ने असम-मेघालय, असम-मिजोरम, असम-अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड-मणिपुर के बीच विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें राज्यों के बीच संघर्ष का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आपसी बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
रिजिजू ने स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक राज्य में प्रकाशित खबरों को दूसरे राज्य के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे लोगों की भावनाएं भड़कने और युवाओं के हिंसा की ओर जाने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास में एक-दूसरे के योगदान को याद रखने की भी अपील की।
अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों के नामों को लेकर भारतीय सर्वेक्षण की कार्रवाई पर भी रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कदम चीन को जवाब देने के लिए नहीं, बल्कि नामों और उनके आधिकारिक इस्तेमाल से जुड़ा प्रशासनिक सुधार था।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को खारिज करते हुए रिजिजू ने कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का चीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने से भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उनके मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और राज्य के लोगों की अपनी अलग ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान है।

