हैदराबाद। देश और दुनिया में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत में वर्ष 2025 के दौरान करीब 15.7 लाख नए कैंसर मामले सामने आए और लगभग 8.68 लाख लोगों की मौत हुई। पांच साल के आंकड़ों की तुलना करें तो कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी कैंसर का बढ़ता बोझ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
दुनिया में 2 करोड़ से ज्यादा नए मामले
WHO और IARC से जुड़े वैश्विक आंकड़ों के अनुसार 2024 में दुनिया में करीब 2.06 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आए और लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत हुई। नए मामलों की संख्या के लिहाज से चीन सबसे ऊपर रहा। इसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान रहा।
हालांकि, आबादी के अनुपात में कैंसर का जोखिम अलग-अलग देशों में काफी अलग है। भारत में 75 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर होने का अनुमानित जोखिम चीन की तुलना में कम बताया गया है।
भारत में पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग कैंसर प्रमुख
ICMR के आंकड़ों के अनुसार भारत में पुरुषों में तंबाकू से जुड़े कैंसर और मुंह के कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। वहीं महिलाओं में स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर प्रमुख हैं।
राज्यों की बात करें तो कुल मामलों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु का स्थान है। हालांकि कुल संख्या और प्रति एक लाख आबादी पर कैंसर की दर को अलग-अलग तरीके से समझना जरूरी है।
पूर्वोत्तर राज्यों में दर ज्यादा
पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में कैंसर के कुल मामले भले ही कम हैं, लेकिन आबादी के अनुपात में इसकी दर चिंता बढ़ाती है। मिजोरम में पुरुषों और महिलाओं में कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बताया गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे स्थानीय खान-पान, धूम्रपान और कुछ पारंपरिक आदतों को संभावित कारणों में गिनाते हैं।
हर 9 में से 1 व्यक्ति को जीवनकाल में खतरा
ICMR के अनुमानों के अनुसार भारत में लगभग हर 9 में से एक व्यक्ति को जीवनकाल में कैंसर होने का जोखिम रहता है। 40 से 64 वर्ष की आयु के लोगों में कैंसर का बोझ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पुरुषों में फेफड़े, मुंह, प्रोस्टेट, जीभ और पेट के कैंसर प्रमुख हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय और फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आते हैं।
कैंसर से बचाव में लाइफस्टाइल अहम
WHO के अनुसार कैंसर के एक बड़े हिस्से को स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम वाले कारकों से दूरी बनाकर रोका जा सकता है। तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह बचना, शराब का सेवन न करना, संतुलित आहार लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना महत्वपूर्ण है।
फलों, सब्जियों और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करने के साथ अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और अधिक लाल या प्रोसेस्ड मीट के सेवन को सीमित करना फायदेमंद हो सकता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की भी सलाह दी जाती है।
वैक्सीनेशन और स्क्रीनिंग से मिलेगी मदद
कुछ कैंसर संक्रमणों से जुड़े होते हैं, इसलिए संबंधित टीकाकरण महत्वपूर्ण है। HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करती है, जबकि हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन लिवर कैंसर से जुड़े जोखिम को कम कर सकती है।
इसके अलावा उम्र, लिंग और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर की सलाह से कैंसर स्क्रीनिंग कराना जरूरी है। बीमारी की शुरुआती पहचान होने पर इलाज के विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
2050 तक बढ़ सकता है वैश्विक बोझ
WHO के वैश्विक अनुमानों के मुताबिक अगर रोकथाम, शुरुआती जांच और इलाज तक पहुंच को बेहतर नहीं किया गया तो 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या करीब 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती उम्र की आबादी, जीवनशैली में बदलाव और स्वास्थ्य सुविधाओं तक असमान पहुंच कैंसर के बढ़ते बोझ की बड़ी वजहों में शामिल हैं। ऐसे में रोकथाम, समय पर जांच और बेहतर इलाज की उपलब्धता को स्वास्थ्य नीतियों में प्राथमिकता देना जरूरी है।

