रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की उच्च शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े दो अहम मामलों में बड़ा निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) को दोबारा आयोजित करने का आदेश दिया है। साथ ही झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा है।
अदालत ने राज्य सरकार को JET परीक्षा के लिए JPSC को नए सिरे से अधियाचना भेजने का निर्देश दिया है। अधियाचना मिलने के छह महीने के भीतर आयोग को परीक्षा आयोजित कर उसका अंतिम परिणाम घोषित करना होगा।
छह महीने में दोबारा होगी JET परीक्षा
विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के नियमित पदों पर सीधी नियुक्ति के बजाय संविदा के आधार पर सेवाएं लिए जाने के मामले को लेकर अनिकेत ओहदार व अन्य की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह JET परीक्षा के आयोजन के लिए JPSC को नई अधियाचना भेजे। अधियाचना मिलने के छह महीने के भीतर परीक्षा आयोजित करने के साथ उसका अंतिम परिणाम भी घोषित करना होगा।
सुनवाई में यह सामने आया कि राज्य सरकार पहले JET परीक्षा का विज्ञापन रद्द कर चुकी है। चूंकि विज्ञापन रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए अदालत ने नई प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
2024 में रुक गई थी JET की प्रक्रिया
JPSC ने अदालत को बताया कि वर्ष 2024 में JET परीक्षा की मॉडल उत्तर कुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी जा रही थीं। इसी दौरान आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
बाद में राज्य सरकार ने JET परीक्षा का विज्ञापन रद्द कर दिया। हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब JET परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी।
JPSC अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पर भी सख्ती
हाईकोर्ट ने JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को लेकर भी राज्य सरकार को स्पष्ट समयसीमा दी है। वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग के शीर्ष पदों पर रिक्तियों को लेकर चिंता जताई।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी की जाए।
सरकार को इस संबंध में 18 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता रोहित राय और अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को भरोसा दिलाया कि निर्धारित दो महीने की अवधि में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

