नई दिल्ली। गिरीश भारद्वाज के लिए पुल सिर्फ नदी के ऊपर बना एक ढांचा नहीं था, बल्कि यह ग्रामीणों की जिंदगी को बेहतर बनाने का माध्यम था। उनके बनाए पुलों ने बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना, मरीजों के लिए अस्पताल जाना और किसानों के लिए अपनी उपज बाजार तक पहुंचाना आसान किया। इसी योगदान के कारण उन्हें ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से पहचान मिली।
कर्नाटक के इंजीनियर गिरीश भारद्वाज ने देशभर में 140 से ज्यादा कम लागत वाले सस्पेंशन फुटब्रिज बनाए। इनमें बड़ी संख्या में पुल ऐसे दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए, जहां नदियां और दुर्गम रास्ते गांवों को मुख्य इलाकों से अलग कर देते थे।
ग्रामीण कनेक्टिविटी और समाजसेवा में उनके योगदान के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
मैकेनिकल इंजीनियर से बने ‘ब्रिज मैन’
गिरीश भारद्वाज का जन्म 12 मई 1950 को कर्नाटक के सुलिया तालुक के एलेटी गांव में हुआ था। उन्होंने 1973 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। उनके करियर को दिशा देने में उनके पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने भारद्वाज को अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल किसानों और ग्रामीणों की समस्याएं दूर करने के लिए प्रेरित किया।
भारद्वाज ने ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवाओं से अपने करियर की शुरुआत की। 1973 में उन्होंने एक दोस्त के साथ एग्रो सर्विस सेंटर शुरू किया। इसके बाद 1975 में सुलिया में रेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज की स्थापना की, जहां पंप सेट और गोबर गैस प्लांट जैसे उपकरणों पर काम किया।
1989 में शुरू हुआ पुल बनाने का सफर
गिरीश भारद्वाज के पुल निर्माण का सफर वर्ष 1989 में शुरू हुआ। उनके क्षेत्र के ग्रामीणों ने पयस्वनी नदी पर फुटब्रिज बनाने में मदद मांगी। मानसून के दौरान नदी पार करना स्थानीय लोगों के लिए बेहद मुश्किल था।
हालांकि सस्पेंशन ब्रिज निर्माण उनकी औपचारिक विशेषज्ञता का हिस्सा नहीं था, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की। साथी इंजीनियरों की तकनीकी मदद और स्थानीय लोगों के सहयोग से उन्होंने अपना पहला सस्पेंशन ब्रिज तैयार किया।
यही प्रोजेक्ट आगे चलकर उनके उस सफर की शुरुआत बना, जिसने उन्हें देश के कई दुर्गम ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाया।
140 से ज्यादा पुल, ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में
पहले पुल के बाद गिरीश भारद्वाज ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार काम किया। अगले तीन दशकों में उन्होंने 140 से ज्यादा हैंगिंग फुटब्रिज बनाए। इनमें करीब 120 पुल मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने के लिए बनाए गए थे, जबकि अन्य पुल पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए गए।
उनका काम कर्नाटक से आगे बढ़कर केरल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक पहुंचा। उनके पुलों का डिजाइन अपेक्षाकृत सरल और कम लागत वाला था। इससे उन क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना संभव हुआ, जहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में अधिक समय और भारी निवेश की जरूरत होती।
पद्म श्री समेत कई सम्मानों से सम्मानित
ग्रामीण कनेक्टिविटी और समाजसेवा में योगदान के लिए वर्ष 2017 में गिरीश भारद्वाज को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनके समर्पण, टीमवर्क और दूरदराज इलाकों में काम करने की इच्छाशक्ति की भी सराहना की गई। उन्हें ‘डॉ. कोटा शिवराम कारंत हुत्तूरा प्रशस्ति’ समेत कई अन्य सम्मानों से भी नवाजा गया।
‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर गिरीश भारद्वाज का 7 जुलाई 2026 को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन के बाद कर्नाटक के नेताओं और उन ग्रामीण समुदायों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिनके जीवन को उनके बनाए पुलों ने आसान बनाया था।

