-खुजली वाले पाउडर से लोगों को बनाते थे निशाना, फर्जी नंबर प्लेट से बदलते थे पहचान; झारखंड-बिहार तक फैला था गिरोह का नेटवर्क
उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। हजारीबाग में राह चलते लोगों से छिनतई और लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले कुख्यात कोढ़ा गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर उसके एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों से हजारीबाग समेत झारखंड और बिहार के अलग-अलग जिलों में 100 से अधिक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की जानकारी मिली है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 27 ग्राम सोने के आभूषण, चार चोरी की मोटरसाइकिल, छह मोबाइल फोन, छह फर्जी नंबर प्लेट और खुजली पैदा करने वाले पदार्थ की 23 पुड़िया बरामद की हैं। मामले का खुलासा उस वक्त शुरू हुआ जब 1 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक हजारीबाग को सूचना मिली कि पूर्व में जिले में छिनतई की कई घटनाओं को अंजाम देने वाला कोढ़ा गिरोह एक बार फिर शहरी क्षेत्र में सक्रिय हो गया है। सूचना थी कि गिरोह के कुछ अपराधी किसी नई वारदात को अंजाम देने के लिए शहर में घूम रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर हजारीबाग रूपक कुमार के नेतृत्व में एंटी क्राइम चेकिंग और छापामारी टीम गठित की गई। टीम में हजारीबाग के विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारियों और सशस्त्र बल को शामिल किया गया। इसके बाद संभावित रास्तों और ठिकानों पर निगरानी शुरू कर दी गई।
झील के पास पुलिस ने बिछाया जाल
एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान पुलिस टीम हजारीबाग झील के आसपास निगरानी कर रही थी। इसी दौरान झील की ओर से दो मोटरसाइकिलों पर चार संदिग्ध आते दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार, पुलिस बल को देखते ही दोनों मोटरसाइकिल सवारों ने गाड़ी घुमाकर भागने का प्रयास किया। लेकिन पहले से सतर्क पुलिस टीम ने घेराबंदी कर चारों को पकड़ लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मिट्टु यादव, रितिक कुमार यादव, सन्नी कुमार यादव और अमन यादव के रूप में हुई। चारों बिहार के कटिहार जिले के कोढ़ा थाना क्षेत्र के नया टोला जुराबगंज के रहने वाले बताए गए हैं। चारों से पूछताछ के बाद पुलिस को गिरोह के दूसरे सदस्यों और उनके ठिकानों के बारे में अहम जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस टीम ने चौपारण थाना क्षेत्र में छापेमारी की।
चौपारण से जुड़े मिले गिरोह के स्थानीय संपर्क
पुलिस की छापामारी टीम चौपारण थाना क्षेत्र के मरेहेड़ी गांव पहुंची। यहां से अरशद खान, अजहर खान और अफसर खान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, इनके घरों की तलाशी के दौरान दो मोटरसाइकिल बरामद की गईं। जांच में सामने आया कि चौपारण बस स्टैंड के पास स्थित एक गैरेज का इस्तेमाल चोरी की मोटरसाइकिलों के रख-रखाव और उन्हें छिपाकर रखने के लिए किया जाता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने स्थानीय लोग जुड़े हुए हैं।
इसी कार्रवाई के दौरान सावन कुमार उर्फ पृथ्वी चंद यादव, निवासी नया टोला जुराबगंज, थाना कोढ़ा, जिला कटिहार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उससे पूर्व की घटना में छीने गए आभूषणों की बरामदगी की गई।
इस तरह कार्रवाई में कुल आठ आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़े।
खुजली वाले पाउडर से बनाते थे लोगों को निशाना
पुलिस पूछताछ में गिरोह के अपराध करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य राह चलते लोगों को निशाना बनाते थे। वारदात के दौरान खुजली पैदा करने वाले पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद पीड़ित के असहज होने या ध्यान भटकने का फायदा उठाकर उसके पास मौजूद सोने के आभूषण या नकदी छीन ली जाती थी। गिरोह की नजर खास तौर पर ऐसे लोगों पर रहती थी, जो बैंक या पोस्ट ऑफिस से पैसे निकालकर वापस लौट रहे होते थे। पुलिस के मुताबिक, ऐसे लोगों की रेकी करने के बाद मौका मिलते ही उन्हें निशाना बनाया जाता था। यानी गिरोह सिर्फ अचानक छिनतई नहीं करता था, बल्कि वारदात के लिए पहले से रेकी और मौके की तलाश भी करता था।
फर्जी नंबर प्लेट से पुलिस को चकमा देने की कोशिश
गिरोह के अपराध करने के तरीके में चोरी की मोटरसाइकिलों और फर्जी नंबर प्लेट की भी अहम भूमिका सामने आई है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान छह फर्जी नंबर प्लेट बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल वारदात में करते थे और पहचान छिपाने के लिए वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाते थे। अलग-अलग घटनाओं में वाहनों और नंबर प्लेटों को बदलने के कारण उनके नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था।
हजारीबाग से चतरा, गिरिडीह और रांची तक फैले तार
जांच में सामने आया है कि गिरोह की गतिविधियां सिर्फ हजारीबाग तक सीमित नहीं थीं। पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, गिरोह से जुड़े मामलों के तार सदर बड़ा बाजार, कोर्रा, लोहसिंघना, मुफस्सिल, बरकट्ठा, कटकमदाग, चौपारण, दारू और विष्णुगढ़ थाना क्षेत्रों तक जुड़े मिले हैं। इसके अलावा रामगढ़, चतरा, गिरिडीह और रांची में भी गिरोह से संबंधित कांड सामने आए हैं। पुलिस ने कई थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों की सूची भी जारी की है, जिसमें छिनतई और लूट से जुड़े मामले शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में कुछ का पुराना आपराधिक इतिहास भी पुलिस जांच में सामने आया है। पुलिस के अनुसार, अमन यादव पूर्व में मोटरसाइकिल चोरी और छिनतई के मामलों में जेल जा चुका है। सन्नी कुमार भी मोटरसाइकिल चोरी के मामले में जेल जा चुका है, जबकि मिट्टु यादव पश्चिम बंगाल में अवैध शराब से जुड़े मामले में जेल जा चुका है।
कटिहार से संचालित होता था नेटवर्क
पूछताछ में पुलिस को गिरोह के कथित मुख्य संचालकों के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, पुसु यादव उर्फ हीरा यादव, आनंद यादव उर्फ दिपु यादव, विकास यादव उर्फ रंगीला यादव उर्फ मंटू यादव, सावन कुमार उर्फ पृथ्वी चंद यादव, सुजल कुमार यादव उर्फ साजन यादव और राजकुमार यादव उर्फ बल्ला यादव गिरोह के प्रमुख सदस्यों के तौर पर सामने आए हैं।
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क कटिहार के कोढ़ा क्षेत्र से संचालित होता था और इसके सदस्य अलग-अलग जिलों में पहुंचकर रेकी तथा छिनतई की घटनाओं को अंजाम देते थे। चौपारण क्षेत्र में चोरी की मोटरसाइकिलों को छिपाने और रखने के लिए स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल किए जाने की भी जानकारी मिली है।
27 ग्राम सोना, चार बाइक और छह फर्जी नंबर प्लेट बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 27 ग्राम सोने के आभूषण, चोरी की चार मोटरसाइकिल, छह मोबाइल फोन, छह फर्जी नंबर प्लेट और 23 पुड़िया खुजली पैदा करने वाला पदार्थ बरामद किया है। बरामद सोने के आभूषण किन-किन घटनाओं में छीने गए थे, इसकी पहचान के लिए पुलिस जांच कर रही है। वहीं चोरी की बरामद मोटरसाइकिलों के बारे में भी संबंधित थानों से जानकारी जुटाई जा रही है।
आठ गिरफ्तार, लेकिन नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना बाकी
कोढ़ा गिरोह के आठ सदस्यों की गिरफ्तारी हजारीबाग पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। एक साथ कई आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में आपराधिक घटनाओं का खुलासा होने से आने वाले दिनों में पुराने मामलों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है।
हालांकि पुलिस की कार्रवाई अभी यहीं खत्म नहीं हुई है। पूछताछ में सामने आए गिरोह के कथित मुख्य संचालकों और अन्य सहयोगियों तक पहुंचना अब पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने किन-किन जिलों में कितनी घटनाओं को अंजाम दिया, चोरी और छिनतई के सामान को कहां खपाया जाता था और चोरी की मोटरसाइकिलों की व्यवस्था करने से लेकर फर्जी नंबर प्लेट उपलब्ध कराने तक कौन-कौन लोग इस नेटवर्क में शामिल थे।हजारीबाग पुलिस की इस कार्रवाई ने फिलहाल जिले में सक्रिय छिनतई गिरोहों के खिलाफ अभियान को एक बड़ी सफलता दी है, लेकिन पुलिस की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की कितनी गहरी जड़ें अभी बाकी हैं।

