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संथाल परगना में डिटेंशन सेंटर की मांग, बाबूलाल मरांडी ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

पाकुड़। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने संथाल परगना क्षेत्र में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर पश्चिम बंगाल से सटे संथाल परगना के जिलों में कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया है।

मरांडी ने अपने पत्र में संथाल परगना के कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बदलाव का मुद्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि पाकुड़, लिट्टीपाड़ा, जरमुंडी, मधुपुर, बरहेट, राजमहल, जामताड़ा, सारठ, नाला, पोड़ैयाहाट, महगामा, दुमका, महेशपुर और गोड्डा विधानसभा क्षेत्रों में एक विशेष समुदाय के मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि अन्य वर्गों की वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है।

पत्र में मरांडी ने वर्ष 2001 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए विशेष रूप से पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में मुस्लिम आबादी में वृद्धि का दावा किया है। उन्होंने आदिवासी और मूलवासी आबादी के अनुपात में कमी का भी उल्लेख किया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा भूमि कानूनों का उल्लंघन कर सरकारी, गोचर और आदिवासी परिवारों की जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।

मरांडी ने अपने पत्र में फर्जी वंशावली, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर बाहरी लोगों को बसाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने और दस्तावेजों की वैधता की पड़ताल करने की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्थानीय स्तर पर कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों के संरक्षण के कारण कथित घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।

केंद्रीय गृह मंत्री से की गई मांगों में संथाल परगना के सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाकर कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान, वर्ष 2003-04 के खतियान और भू-अभिलेख के आधार पर वंशावली का सत्यापन तथा डिटेंशन सेंटर स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा मतदाता सूचियों की जांच कर संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्ज नामों की समीक्षा करने की मांग भी की गई है।

मरांडी ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और उन्हें कथित संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

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