रांची। हजारीबाग स्थित डिटेंशन सेंटर में रह रही एक बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म के आरोपों के मामले में झारखंड सरकार ने तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया है। यह जानकारी सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग की ओर से अदालत में पेश की गई सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला ने तीन पुलिसकर्मियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है।
हाईकोर्ट ने महिला को जरूरी सुविधाएं देने का दिया निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को डिटेंशन सेंटर में रह रही महिला को सभी जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी ली। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
तीन पुलिसकर्मियों पर FIR, जांच जारी
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महिला के आरोपों के आधार पर तीन कांस्टेबल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। अदालत ने प्राथमिकी में लगाई गई धाराओं को लेकर भी सवाल किया। महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत को बताया कि आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
महिला को बांग्लादेश भेजने में देरी पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान महिला को लंबे समय से डिटेंशन सेंटर में रखे जाने का मामला भी उठा। राज्य सरकार ने बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से विदेश मंत्रालय को पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन केंद्र से अब तक जवाब नहीं मिला है। हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के अधिवक्ता से जवाब दाखिल करने को कहा है।
सजा पूरी होने के बाद हिरासत पर कोर्ट सख्त
अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के तहत तीन साल की सजा सुनाई गई थी और उसने सजा पूरी कर ली थी, तो इसके बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया। कोर्ट ने वर्ष 2025 में उसके खिलाफ दोबारा विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने और वर्ष 2026 में उसके बरी होने के बावजूद हिरासत में रखे जाने पर भी सवाल उठाया।
राज्य सरकार के अनुसार, महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में बच्चे के अपहरण और विदेशी अधिनियम से जुड़े मामले दर्ज हुए थे। बाद में उसे डिटेंशन सेंटर भेजा गया। वर्ष 2025 में उसके वहां से भागने के बाद एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वह वर्ष 2026 में बरी हुई।
हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार से आवश्यक जवाब मांगा है।

