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फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान पर बयान से सियासी घमासान, भाजपा ने कार्रवाई की मांग की

श्रीनगर/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान और कश्मीर मुद्दे पर दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश-विरोधी करार दिया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भाजपा नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी कहा है।

यह विवाद शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को उत्तरी कश्मीर के बारामुला में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण के बाद सामने आया। फारूक अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

क्या बोले थे फारूक अब्दुल्ला?

बारामुला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के मुद्दे को उठाता है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और कश्मीरियों को न्याय मिलने को लेकर भी सवाल किए।

उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और अपनी पहचान की रक्षा के लिए दृढ़ रहने की अपील की। उनके बयान का एक हिस्सा, जिसमें उन्होंने पड़ोसी देश की भूमिका को कश्मीरियों के लिए महत्वपूर्ण बताया, राजनीतिक विवाद का मुख्य कारण बना।

फारूक अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि कश्मीर के लोग भारत के नागरिक हैं और उन्होंने कभी अपनी भारतीय पहचान से इनकार नहीं किया है। उन्होंने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के भारत का उल्लेख करते हुए देश के साथ जम्मू-कश्मीर के संबंधों पर अपनी पार्टी का रुख दोहराया।

भाजपा ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने बयान को देश-विरोधी बताते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान को कश्मीरियों का हितैषी बताने वाला बयान पड़ोसी देश के पक्ष को राजनीतिक वैधता देता है। पार्टी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा करते समय जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद और हिंसा के इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भाजपा नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला से देश की जनता के सामने सार्वजनिक माफी मांगने की मांग भी की। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति पर भी ध्यान देने की नसीहत दी।

अनुच्छेद 370 को लेकर भी उठे सवाल

भाजपा नेताओं ने अपने जवाब में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी उल्लेख किया। उनका तर्क है कि इस फैसले के बाद क्षेत्र में विकास, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

हालांकि, अनुच्छेद 370 के प्रभाव और जम्मू-कश्मीर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। फारूक अब्दुल्ला और उनकी पार्टी पहले भी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग उठाते रहे हैं।

इस विवाद ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य, केंद्र सरकार की नीतियों और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चल रही बहस को चर्चा में ला दिया है।

कांग्रेस ने भी रखी अपनी बात

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख कपिल सिंह ने कहा कि यह फारूक अब्दुल्ला का व्यक्तिगत दृष्टिकोण हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग भी उठाई गई। इस तरह बयान को लेकर राजनीतिक विवाद केवल भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा की आपत्ति के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा जहां उनके बयान को पाकिस्तान के पक्ष में बताकर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं अब्दुल्ला ने अपने भाषण में कश्मीरियों के अधिकारों और भारतीय पहचान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की थी।

फिलहाल विवाद का केंद्र उनका पाकिस्तान संबंधी बयान और उस पर भाजपा की कानूनी कार्रवाई की मांग है। किसी भी कानूनी कार्रवाई या मामले के दर्ज होने की पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

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