विशेषज्ञता आधारित सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगी प्राथमिकता, साइबर सुरक्षा और ड्रोन से निपटने की क्षमता भी होगी मजबूत
-अजय निराला / उज्ज्वल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का नया संगठनात्मक ढांचा 1 नवंबर 2026 से लागू होगा। इस पुनर्गठन के तहत पारंपरिक क्षेत्रीय व्यवस्था के स्थान पर कार्यात्मक और विशेषज्ञता आधारित सुरक्षा प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे देश के बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात उद्योगों, पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की एनटीपीसी-सीएमपी इकाई, हजारीबाग के उप कमांडेंट सुरेश जी और सहायक कमांडेंट संजीव कुमार मीणा ने बताया कि पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता बढ़ाना, परिचालन समन्वय को बेहतर बनाना और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की जिम्मेदारियों को संबंधित प्रतिष्ठानों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित किया जाएगा।
साइबर सुरक्षा और ड्रोन से निपटने की क्षमता होगी मजबूत
नए संगठनात्मक ढांचे के तहत बंदरगाहों और हवाई अड्डों की सुरक्षा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा तथा ड्रोन से उत्पन्न होने वाले खतरों से निपटने की क्षमताओं को भी मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इससे बदलती तकनीक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल देश के महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में सीआईएसएफ की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने में भी सहायक होगी।
कोयलांचल में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की मुहिम
हजारीबाग जिले के कोयलांचल क्षेत्रों में भी सीआईएसएफ अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। कोयला तस्करी के खिलाफ छापेमारी के माध्यम से अवैध कारोबार पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सीआईएसएफ का उद्देश्य कोयला, बालू समेत अन्य खनिज एवं पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। बल की कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


