देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीर को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके घर भेजने की व्यवस्था की गई। रविवार, 1 नवंबर को मृतकों के शव ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाए गए। यहां से चार यात्रियों के पार्थिव शरीर विमान से बेंगलुरु भेजे गए, जबकि एक अन्य यात्री का शव दिल्ली के रास्ते गोवा भेजने की व्यवस्था की गई। हादसे में जान गंवाने वाले पायलट का शव सड़क मार्ग से दिल्ली भेजा गया।
बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर हुआ था दुर्घटनाग्रस्त
यह हादसा 30 अक्टूबर को हुआ था। ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में चाई गांव के पास हाथी पर्वत की पहाड़ियों में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली का निवासी था।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में चलाया गया बचाव अभियान
दुर्घटनास्थल दुर्गम पहाड़ी इलाके में होने के कारण बचाव दल को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), उत्तराखंड पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की टीमों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया।
कठिन परिस्थितियों के बीच बचाव दल ने सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीर बरामद किए। इसके बाद उन्हें ज्योतिर्मठ से ऋषिकेश स्थित एम्स पहुंचाया गया।
एम्स ऋषिकेश में पूरी हुई जरूरी प्रक्रिया
एम्स ऋषिकेश में मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद पार्थिव शरीरों को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
हादसे में जान गंवाने वालों के पार्थिव शरीरों को उनके गृह नगर भेजे जाने के साथ ही बचाव अभियान भी पूरा कर लिया गया।
हादसे में छह लोगों की गई थी जान
चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना ने एक बार फिर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। हादसे के बाद संबंधित विमानन अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की है।

