-उपायुक्त हजारीबाग को जांच का कड़ा निर्देश, मुख्य सचिव कार्यालय के रडार पर मामला
-बिष्णुगढ़ के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी अखिलेश कुमार और जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ पर लगा गंभीर आरोप
-केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (PMAY-G) और राज्य सरकार की ‘अबुआ आवास योजना’ (AAY) दोनों में अयोग्य लाभुकों से रिश्वत लेकर फंड जारी करने का मामला
-ग्रामीण विकास विभाग और मुख्य सचिव कार्यालय ने लिया कड़ा संज्ञान; उपायुक्त हजारीबाग से मांगी गई सुस्पष्ट जांच रिपोर्ट
-अजय निराला/ उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत बिष्णुगढ़ प्रखंड में गरीबों की आवास योजनाओं में बड़े पैमाने पर लूट और रिश्वतखोरी का एक बेहद गंभीर और नामजद मामला आधिकारिक तौर पर सामने आया है। यह मामला वित्तीय वर्ष 2023-2024 और 2024-25 से जुड़ा है। हजारीबाग के अधिवक्ता पवन कुमार यादव के परिवाद पत्र पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव कार्यालय और ग्रामीण विकास विभाग ने तीखा रुख अख्तियार किया है। आरोपों के केंद्र में बिष्णुगढ़ के पूर्व बीडीओ अखिलेश कुमार और स्थानीय जनप्रतिनिधि हैं, जिनपर नियमों को ताक पर रखकर केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (PMAY-G) तथा राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अबुआ आवास योजना’ (Abua Awas Yojana – AAY) दोनों ही योजनाओं के तहत अयोग्य लोगों से मोटी रिश्वत लेकर सरकारी राशि आवंटित करने का सनसनीखेज आरोप लगा है।
क्या है सरकारी दस्तावेज में दर्ज पूरा मामला ?
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्रांक 2628 दिनांक 18 अगस्त 2026 के अनुसार, यह पूरा मामला मुख्य सचिव कार्यालय, झारखंड (पत्रांक 5956) के माध्यम से सरकार के रडार पर आया है। दोनों आवास योजनाओं में रिश्वतखोरी: परिवादी पवन कुमार यादव ने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई है कि बिष्णुगढ़ के तत्कालीन बीडीओ अखिलेश कुमार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से असली गरीबों का हक मारा गया। जो गरीब बेघर हैं और कच्चे मकानों में रह रहे हैं, उन्हें दरकिनार कर संपन्न और अपात्र लोगों से ‘मोटा नजराना’ लेकर उन्हें PMAY-G और अबुआ आवास योजना दोनों का पैसा दे दिया गया।
फंड का व्यावसायिक डायवर्जन
स्थानीय सूत्रों और शिकायतों के अनुसार, इसी प्रकार भ्रष्टाचार और रिश्वत के माध्यम से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अवैध रूप से शहर में चमचमाता ‘Biggies Burger’ (बिगिज बर्गर) आउटलेट खोलने और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में निवेश करने के लिए किया गया।
प्रशासनिक आदेश के बावजूद रिपोर्ट दबाने का आरोप
ग्रामीण विकास विभाग के अवर सचिव अमरेश कुमार ने पत्रांक 2628 दिनांक 18 अगस्त2026 के माध्यम से उपायुक्त हजारीबाग को पत्र भेजा है। भेजे गए उक्त पत्र में इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई गई है कि पूर्व में जारी आदेशों के बावजूद अब तक जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी गई है। सरकारी पत्र के अनुसार, पूर्व में भी इस मामले में 03 दिनों के अंदर सुस्पष्ट जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, जो लंबे समय तक अप्राप्त रहा। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए हजारीबाग उपायुक्त को मामले की त्वरित और गहन जांच कर अविलंब रिपोर्ट भेजने का दोबारा सख्त निर्देश दिया है।
RTI (सूचना का अधिकार) से खुला राज
इस महाघोटाले की कड़ियां तब जुड़ीं जब सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत राज्य जन सूचना पदाधिकारी-सह-अवर सचिव मो० शहजाद अहमद द्वारा विभागीय पत्रांक 782 (दिनांक 15 सितंबर 2026) के जरिए आवेदक को कार्रवाई से संबंधित पीत पत्र और प्रतिवेदन उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेज ने साफ कर दिया है कि आरोपी पूर्व बीडीओ और जनप्रतिनिधि अब पूरी तरह घिर चुके हैं और मामला पूरी तरह से स्थापित हो चुका है।
इलाके में हड़कंप, कार्रवाई की मांग तेज
केंद्र और राज्य सरकार की दोनों प्रमुख आवास योजनाओं में सीधे तौर पर बिष्णुगढ़ के पूर्व बीडीओ (BDO) अखिलेश कुमार का नाम सामने आने और मुख्य सचिव कार्यालय के कड़े रुख के बाद प्रखंड विकास कार्यालय और स्थानीय रसूखदार जनप्रतिनिधियों में खलबली मची हुई है। स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने मांग की है कि गरीबों के हक के आशियाने पर डाका डालकर बर्गर आउटलेट जैसे कमर्शियल बिजनेस चमकाने वाले इस पूरे नेक्सस को तुरंत ध्वस्त किया जाए, दोषी पूर्व बीडीओ को सस्पेंड कर जेल भेजा जाए।




