Author: ujjwalduniyapress

  • हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित शिक्षकों ने की वित्त मंत्री रामेश्वर उरावं से मुलाकात

    उज्ज्वल दुनिया /रांची। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा नियोजन नीति को निरस्त करने और शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के दिये गये फैसले से प्रभावित शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज रांची में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डाॅ. रामेश्वर उरांव से मुलाकात की। 

    सरकार जल्द ही पुनरीक्षण याचिका दायर करेगी – रामेश्वर उरावं 

    शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री रामेश्वर उरांव को यह जानकारी दी कि इस पूरे प्रकरण में उनका कोई दोष नहीं है, इसलिए उनके वेतन भुगतान पर कोई अंकुश न लगायी जाए साथ ही साथ जल्द ही उच्च न्यायालय के फैसले के में पुनरीक्षण याचिका दायर की जाए। शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को मंत्री रामेश्वर उरांव ने भरोसा दिलाया कि सरकार उनसभी के साथ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी बात करेंगे और यह कोशिश की जाएगी कि उनकी नौकरी खत्म न हो। 

    कौन-कौन थे मौजूद 

    इस मौके पर कृषिमंत्री बादल, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे,डा राजेश गुप्ता छोटू और लाल किशोरनाथ शाहदेव भी उपस्थित थे।
    13 जिलों के नियोजन नीति से प्रभावित शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल में शिक्षक नेता समीर चौधरी, अर्चना कुमारी,शिवेंद्र कुमार,संजय कुमार, मदन साहू, शशि भूषण राजू,पूर्णिमा तिवारी,संजीव कुमार, आशीष सिन्हा, समर महतो, प्रमोद यादव भी उपस्थित थे

  • सहायक पुलिसकर्मियों का आंदोलन समाप्त, दो साल का अनुबंध बढ़ा, सैलरी भी बढ़ेगी

    उज्ज्वल दुनिया /रांचीः राज्य सरकार के साथ सार्थक वार्ता के बाद 12 दिनों से चल रहे सहायक पुलिस कर्मियों का आंदोलन समाप्त हो गया है. झारखंड सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर और सहायक पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई वार्ता के बाद सहायक पुलिस कर्मियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी.

    दो साल का अनुबंध बढ़ा, सैलरी भी बढ़ेगी

    झारखंड सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर के आवास पर सहायक पुलिसकर्मियों के साथ बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. जिसमें सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने सहायक पुलिस कर्मियों को यह भरोसा दिलाया कि उनका अनुबंध सरकार 2 साल के लिए बढ़ा रही है. जबकि वेतन में भी तीन हजार की बढ़ोतरी की जा रही है. वहीं सरकार ने सहायक पुलिस कर्मियों से 15 दिन का समय लिया है, जिसमें उनकी बाकी मांगों पर भी विचार कर उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. 

    बसों से निकले अपने घर

    जैसे ही सरकार और सहायक पुलिस कर्मियों के बीच वार्ता सफल हुई. वैसे ही मोरहाबादी मैदान में जमे सहायक पुलिसकर्मियों में खुशी की लहर दौड़ गई. उन्होंने तुरंत अपना सामान पैक किया और प्रशासन के द्वारा उपलब्ध करवाए गए बसों में बैठकर अपने घर रवाना हो गए.

    सरकार के फैसले से खुश नजर आए

    मोरहाबादी मैदान में अपने आंदोलन को खत्म करने के बाद सहायक पुलिस कर्मियों ने कहा कि वे सरकार के निर्णय से काफी खुश हैं और अब दोगने उत्साह से अपने ड्यूटी पर लौटेंगे.

  • शिक्षा विभाग के कर्मी बने ठेकेदार, पदाधिकारी व प्रबंधन समिति के मिलीभगत से पोशाक व स्टेशनरी किट वितरण में हो रही है पैसों की बंदरबांट

    सरकार के निर्देश को ताख में रखकर कर रहे हैं पोशाक व स्टेशनरी किट का सप्लाई

    जिला से लेकर प्रबन्धन समिति तक को बंधी बंधाई रकम मिलती है इसलिये नही होती है जांच – आरोप 

    नितेश जायसवाल/ उज्ज्वल दुनिया /लातेहार ।  जिले के कई प्रखण्डों में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के मिली भगत से स्कूली बच्चों के पोशाक व स्टेशनरी किट सप्लाई में हो रही है पैसों की बंदरबांट।बताते चलें कि इन दिनों करोना के मद्देनजर सभी विद्यालय मार्च माह से ही बंद है।फिर भी इन छुट्टियों के दिनो में भी लातेहार जिले के हेरहंज प्रखण्ड में  बी आर पी निरंजन सिंह व प्रबन्धन समिति के मिलीभगत से ड्रेस व स्टेशनरी किट का सप्लाई विद्यालय में जोरों शोरों से किया जा रहा है।इसमे विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाध्यापक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बंधी बंधाई कमीशन की रकम मिलती है। सरकार के निर्देश के अनुसार कक्षा 1 से लेकर पांच तक के लिये प्रति बच्चा 600 रुपये व कक्षा 6 से लेकर 8 तक के लिए 760 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।इस लेटर में स्पष्ट रूप से यह लिखा गया है कि जिन बच्चों का खाता बैंक में खोलवाया गया है उनका किट का पैसा उनके खाते में डालनी है और जिन बच्चों का खाता बैंक में नही है उनका पैसा विद्यालय प्रबंधन समिति के खाते में डालना है जिससे समिति के लोग उस पैसों को निकालकर अच्छी किस्म का ड्रेस स्वेटर व एक जोड़ा जुता मौजा खरीदकर बच्चों को दें।साथ ही जो स्टेशनरी किट देना है वो भी प्रबन्धन समिति खाते से पैसे निकालकर अपने प्रखण्ड के अच्छे दुकान से बढ़िया किस्म की कॉपी,कलम व स्टॉमन इत्यादि वस्तुयें खरीदकर बच्चों के बीच वितरण करें। लेकिन बिचौलिये और पदाधिकारीयों के मिलीभगत से सभी स्कूली बच्चों के पैसों को प्रबन्धन समिति के खाते में डलवाया जा रहा है और उसके बाद घटिया सामग्री का सप्लाई खुद बी आर पी निरंजन सिंह के द्वारा विद्यालयों में किया जा रहा है।।इस बात की जानकारी उच्च पदाधिकारियों को भी है लेकिन अब तक इनलोगों के विरुद्ध कोई ठोस कदम नही उठाना इस बात का संकेत देती है कि इसका सेटलमेंट उच्च अधिकारियों तक भी है।

     गौरतलब है कि सरकार के  द्वारा सभी विद्यालयों के प्राचार्य को सख्त निर्देश जारी किया गया था कि सभी बच्चों का खाता बैंक में खोलवाया जाय।जिससे उनको मिलने वाला लाभ उसके खाते में जा सके।लेकिन खाता खुलवाने के बाद भी पैसा खाता में न डालकर प्रबन्धन समिति के खाते में डाला जाता है।जिसे सभी के मिलीभगत से सामान खरीदने के नाम पर लूटा जाता है।

    क्या कहते हैं बीडीओ ?

    बी डी ओ प्रदीप कुमार दास ने बताया कि मुझे मामले की जानकारी कुछ दिन पूर्व अखबार के माध्यम से हुई।मैने सरकार के द्वारा प्राप्त लेटर को लेकर बी ई ओ से मांग की  है।अगर सरकार के निर्देश को ताख में रखकर कोई भी व्यक्ति सप्लाई का काम कर रहें हैं तो मैं इसपर जिला को पत्र लिखूंगा।साथ ही मैं चाहूंगा कि मामले की जाँच हो और दोषियों पर उचित करवाई हो।

    मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं- बीईओ

    बी ई ओ एच प्रमाणिक से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इसके बारे में मेरे पास कोई जानकारी नही है।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेरे पास कंटीजेंसी नही है जो कि मैं विद्यालय के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट को रख सकूँ।मेरे पास जो भी रिपोर्ट विद्यालय के द्वारा आता है उसे जिले भेज देता हूँ।आप जाकर खुद जिला से या विद्यालय के प्राचार्य से रिपोर्ट माँग लें।

    इन तीनों पैराग्राफ़ को अलग-अलग बॉक्स में लिखें 

    कांग्रेस अध्यक्ष लाडले खान ने कहा कि मैंने इस मामले में बी आर पी निरंजन कुमार सिंह से बात की थी।उन्होंने बात को टालते हुए कहा कि मैं अभी व्यस्त हूँ।आपसे बाद में बात करूँगा।मुझे यह समझ मे नही आया कि सरकार कोई भी अधिकारी को विभाग के काम करने के लिये नियुक्त करती है या ठीकेदारी करने के लिये।सरकार के नियम को ताख में रखकर निरंजन सिंह खुद पोशाक का सप्लाई कर रहे हैं।मैं इस विषय मे माननिय मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से इस सम्बंध में बात करूंगा।
    पूर्व बीस सुत्री अध्यक्ष विजय गुप्ता ने कहा कि ये जो मामला लगातार मीडिया के माध्यम से प्रकाश में आ रहा है यह निन्दनीय है।सरकारी कर्मचारी अपना काम छोड़ कर ठीकेदारी करने लगे तो यह सोचनीय है।ये जो बिचौलियों के मिलीभगत से पोशाक का पैसा बच्चों के खाते में न डालकर प्रबंधन समिति में डलवा रहे हैं और घटिया सप्लाई करके पैसों का बंदरबांट कर रहे हैं।मैं उपायुक्त महोदय से आग्रह करूँगा की मामले की जांच बारीकी से करने के लिये एस आई टी का टीम गठित की जाय और मामले की जांच करते हुए दोषियों पर कठोर करवाई की जाय।
    पूर्व सांसद प्रतिनिधि रंजीत जायसवाल ने कहा कि अगर ऐसी बात है निरंजन कुमार विभाग के काम न करके प्रखण्ड में पोशाक सप्लाई का काम कर रहे हैं तो यह गलत है।सरकार के नियम के विरुद्ध काम करने वाले लोगों पर जांच कर करवाई होनी चाहिए।इसके लिये मैं माननीय सांसद सुनील कुमार सिंह को पत्र लिखूंगा।

  • सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम मामले पर सुनवाई 5 अक्टूबर तक के लिए टली

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सर्विसेज में मुस्लिम समुदाय के कथित घुसपैठ को लेकर प्रसारित होने वाले सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम के मामले पर सुनवाई 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि चूंकि मामला हमारे पास लंबित है, इसलिए सरकार चैनल को जारी कारण बताओ नोटिस पर फैसले लेने से पहले हमें जानकारी दे।

    कोर्ट ने कहा कि सरकार अगली तारीख पर हमें रिपोर्ट दे। कारण बताओ नोटिस पर सरकार का कोई भी फैसला हमारी सुनवाई के आधार पर तय होगा। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या वह अपनी कार्रवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को भी सुनेगी। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह वैधानिक कार्रवाई है, इसमें चैनल को सरकार को जवाब देना है। इसमें किसी और को नहीं सुना जा सकता है। तब याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अगर सरकार का फैसला हमारे पक्ष में नहीं होता तो हम उसे चुनौती देंगे।
    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सरकार ने सुदर्शन टीवी के सिविल सर्विसेज में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर किये विवादित प्रोग्राम को प्रोग्राम कोड का उल्लंघन माना है। इसके लिए चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके खिलाफ एक्शन क्यों न लिया जाए?
    केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुदर्शन टीवी को 28 सितम्बर तक कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल करने का वक्त दिया गया है, तब तक सुनवाई को टाला जा सकता है। तब कोर्ट ने कहा कि अगर हमने दखल देकर प्रोग्राम के प्रसारण पर रोक नहीं लगाई होती तो अब तक तो सारे दस एपिसोड प्रसारित हो चुके होते। केंद्र सरकार ने बताया कि सरकार ने सुदर्शन टीवी के सिविल सर्विसेज में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर किये गए विवादित प्रोग्राम को प्रोग्राम कोड का उल्लंघन माना है। इसके लिए चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके खिलाफ एक्शन क्यों न लिया जाए।
    कोर्ट ने पिछले 21 सितम्बर को सभी एपिसोड देखने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर सात सौ पन्नों की किताब के खिलाफ याचिका हो तो वकील यह दलील नहीं दे सकते कि जज पूरा पढ़ें। सुनवाई के दौरान न्यूज़ ब्राडकास्ट फेडरेशन की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि हम सबसे बड़ी संस्था हैं। न्यूज ब्राडकास्ट एसोसिएशन सबका प्रतिनिधित्व नहीं करती है। हमने एक रेगुलेशन व्यवस्था बनाई है। पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर उसकी अध्यक्षता करेंगे। इसलिए हमें भी सुना जाए। ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव, अपवार्ड फाउंडेशन नाम की संस्थाओं की तरफ से वकील जे साईं दीपक ने कोर्ट की तरफ से हेट स्पीच की परिभाषा तय करने और नियम बनाने का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा करना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। जन्मभूमि डेली की ओर से वकील महेश जेठमलानी ने भी हस्तक्षेप याचिका दाखिल की थी। तब कोर्ट ने कहा था कि सभी हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं को बाद में सुना जाएगा।
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुदर्शन को अपने हलफनामे में एनडीटीवी के कार्यक्रम का हवाला देने के लिए आड़े हाथों लिया था। कोर्ट ने कहा था कि आपसे पूछा गया था कि आप अपने कार्यक्रम में किस तरह का बदलाव करेंगे। जवाब में यह लिखना ज़रूरी नहीं था। कोर्ट ने पूछा था कि क्या आपने पहले चार एपिसोड में प्रोग्राम कोड का पालन किया। क्या आगे भी कार्यक्रम की प्रस्तुति इसी तरह की रहेगी। तब वकील विष्णु जैन ने कहा था कि हमने नियमों का पालन किया। कोर्ट हमारे प्रसारित सभी एपिसोड को पूरा देखे। तब कोर्ट ने कहा था कि यानी आपका कार्यक्रम आगे भी ऐसा ही रहेगा। तब जैन ने कहा कि हम आगे भी नौकरशाही में कब्जे की विदेशी साज़िश का पर्दाफाश करेंगे। तब कोर्ट ने कहा था कि हमें जवाब मिल गया। अब दूसरे वकीलों को सुनने दीजिए।

  • फेसबुक पर फेक अकाउंट के जाल में फंसी युवती

    चंपावत ।  फेसबुक में अपने ही गांव की युवती का फेक अकाउंट बनाकर उसके फोटो अपलोड कर आपत्तिजनक टिप्पणी करना आरोपित युवती को महंगा पड़ा। यह वाकया मैराली गांव का है। इस गांव की पीड़ित ने 4 मई को इस संबंध में थाना पाटी में शिकायत दी थी। साइबर सेल ने पड़ताल की तो सामने आया कि गांव की ही एक युवती ने यह सब किया है। पुलिस ने मंगलवार को उसे और उसके परिजनों को थाने पर बुलाकर पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि आरोपित ने गुनाह कुबूल कर लिया। उसने कहा कि उस लड़की से उसका किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसलिए उसने ऐसा किया। पुलिस के मुताबिक पीड़ित की काउंसिलिंग की गई। उसने माफीनामा दिया है। पीड़ित ने भी उसे माफ कर दिया है। 

  • बलिया की युवती के खाते में अचानक आ गए करीब 10 करोड़ रुपये

    परिजनों ने पैसा निकालने से किया इनकार

    बलिया (यूपी) । गरीब युवती के खाते में अचानक 9 करोड़ 99 लाख रुपए जमा हो गया. जब पैसे की जानकारी मिली तो परिवार खुश होने के बदले परेशान हो गया. बैंक गए और मामले की जानकारी ली, लेकिन युवती और उसके परिजनों ने पैसा निकालने से इनकार कर दिया. अगर चाहते तो परिवार की स्थिति कुछ दिनों में बदल जाती, लेकिन निकालने से साफ मना कर दिया. यह मामला यूपी के बलिया का है. 

    पैसा आने से परिवार परेशान

    युवती और उसके परिजन चाहते तो पैसा निकाल सकते थे, लेकिन परिजनों ने बैंक में जाकर जांच कराया तो पता चला है कि वर्तमान में खाता में करीब 9 करोड़ 99 लाख रुपए है. लेकिन परिजनों ने पैसा डर से नहीं निकाला और इसकी जानकारी पुलिस को दे दी. पुलिस और बैंक के अधिकारी अब जांच में जुटे है कि आखिर किसने और कैसे इतनी मोटी रकम युवती के खाते में किसने डाला है. 

    युवती के पिता गैराज में करते हैं काम

    बलिया जिले के रूकूनपुरा गांव की रहने वाली युवती सरोज के पिता गुजरात में एक गैराज में काम करते हैं. युवती का इलाहाबाद बैंक की बांसडीह शाखा में खाता था. युवती ने पुलिस को बताया कि इंदिरा आवास को लेकर आधार कार्ड और पासबुक जान पहचान के एक शख्स को दिया था. इसके अलावे वह किसी के साथ खाता नंबर शेयर नहीं किया था. जिसको खाता दिया था वह कानपुर का रहने वाला है. उसका नाम निलेश है. निलेश ने ही बाद में उसका एटीएम मंगाया था. उसके बाद से वह एटीएम उसके पास का भी था. युवती ने बताया ति वह अधिक पढ़ी नहीं है वह सिर्फ साइन करना जानती है.

    फिलहाल पुलिस इससे साइबर क्राइम का मामला मान जांच में जुटी है. वही, युवती और उसके परिजनों ने कहा कि इस पैसे से कोई लेना देना नहीं है. फिलहाल पुलिस ने पैसे की निकासी पर रोक लगा दिया है. 

  • विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं चिराग पासवान

    केन्द्र की राजनीति छोड़, बिहार की सियासत पर ध्यान देने का निर्णय

    पटना । एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर अब तक फैसला नहीं हो पाया है लेकिन में लोक जनशक्ति पार्टी अभी भी 143 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने को लेकर गंभीर है. एलजेपी सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक पार्टी चिराग पासवान को भी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतार सकती है.

    जेडीयू से तालमेल नहीं तो 143 सीटों पर लड़ने की तैयारी

    चिराग पासवान को विधानसभा चुनाव लड़ाया जाए या नहीं इसको लेकर पार्टी में गंभीरता से मंथन चल रहा है. पार्टी के ज्यादातर बड़े नेताओं का मानना है कि अगर जनता दल यूनाइटेड के साथ सम्मानजनक तालमेल नहीं हो पाता है तो वैसी स्थिति में चिराग पासवान को केंद्र की राजनीति छोड़कर बिहार की राजनीति में सक्रिय होना चाहिए.

    बीजेपी के खिलाफ नहीं, नीतीश कुमार के अहंकार के खिलाफ

    एलजेपी सूत्रों के मुताबिक चिराग पासवान को विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है. हालांकि चिराग पासवान मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे या नहीं फिलहाल इस को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है लेकिन बीजेपी के लिए 100 सीटों को छोड़कर बाकी 143 सीटों पर एलजेपी गंभीरता से चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है. चिराग ने दिल्ली में बैठक बुलाई है. पार्टी नेताओं के साथ मंथन के बाद चिराग जल्द ही कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं. 

  • वीआरएस लेने के बाद सोशल मीडिया पर “मेरी कहानी, मेरी जुबानी ” लेकर आ रहे हैं गुप्तेश्वर पांडे

    उज्ज्वल दुनिया

    पटना । बिहार के डीजीपी के पद से वीआरएस ले चुके गुप्तेश्वर पांडेय नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। गुप्तेश्वर पांडेय राजनीति में अपनी नई इनिंग स्टार्ट करने जा रहे हैं। पद से वीआरएस लेने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय आज शाम में जनता से सीधा संवाद करने वाले हैं। नई पारी की शुरुआत को लेकर वह कई बड़े खुलासे कर सकते हैं। 

  • ले लोटा…..आप तो कमाल हैं दास जी!

    मेरे एक पुराने मित्र हैं. खांटी संघी. देश के विभिन्न प्रांतों में वर्षों संघ प्रचारक रहे.छात्र जीवन से अव्वल श्रेणी के संगठनकर्ता.
    फिलहाल बतौर स्वतंत्र पत्रकार देश विदेश के विभिन्न मीडिया संस्थानों में लिख रहे हैं और झारखंड-बिहार में राष्ट्रवादी संगठनों के सृजन और सृजित संगठनों के दिशा निर्देशन में लगे हैं.

    खांटी संघी होने के बावजूद सभी विचारधारा के दलों व जमातों के बीच उनकी स्वीकार्यता के मद्देनजर मैं उन्हें ‘छद्म कामरेड’ संबोधित करता हूँ. मेरे प्रति असीम अनुराग के कारण मेरे व्यंग्यात्मक संबोधन पर वो कभी प्रतिकार नही करते .

    किसी भी मुद्दे पर साहित्यिक व वैदिक उद्धरणों में माहिर मेरे उपरोक्त विलक्षण मित्र के साथ पिछले दिनों रांची शहर से बाहर जा रहा था. मोरहाबादी मैदान के पास आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों के बीच सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास पहुंचे हुये थे.

    गहमागहमी देख मैंने अपनी गाड़ी रोक दी और दास जी का आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मियों से संवाद देखने- सुनने लगा. रघुबर दास को संवेदना के साथ सहायक पुलिसकर्मियों से संवाद करता देख मुझे आश्चर्य हुआ!

    सत्ता में रहने के दौरान रघुबर दास को बतौर मुख्यमंत्री रांची, गढ़वा, हजारीबाग, मुंबई और दिल्ली समेत कई शहरों में नजदीक से देख रखा था. अधिकारियों, उधोगपतियों, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों व आम लोगों से बातचीत के दौरान दास जी भाषायी मर्यादा तो छोड़िये, मानवीय सहज संवेदनशीलता को भी तार- तार कर दिया करते थे.

    मैंने अपने मित्र को संबोधित करते हुये कहा – ले लोटा, रघुबर दास में तो कमाल का बदलाव आ गया भाई जी.कुर्सी से उतरते ही मिज़ाज बदल जाता है क्या❓

    मित्रवर ने अपने निराले काव्यउद्धरण अंदाज में कहा – मुन्ना बाबू (मेरा घरेलू नाम), राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कालजयी रचना ‘ रश्मिरथी’ में बरसों पहले लिख डाला था …

    “प्रण करना है सहज, कठिन है लेकिन उसे निभाना,
    सबसे बड़ी जांच है व्रत का अंतिम मोल चुकाना।”
    “अंतिम मूल्य न दिया अगर, तो और मूल्य देना क्या?
    करने लगे मोह प्राणों का – तो फिर प्रण लेना क्या?”

    मैंने कहा -भाई जी, सीधा बोलिये ना. आपका ये काव्य-वेद समझ में नहीं आता. वे बोले – इन आंदोलनरत युवक-युवतियों को दस हजारी नौकरी देकर सुनहरे भविष्य के ख्वाब किसने दिखाये थे?
    मैंने कहा – रघुबर दास की सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों के युवक-युवतियों को बतौर सहायक पुलिसकर्मी बड़े ताम-झाम के साथ बहाल किया था भाई जी.

    भाईजी बोले- सियासत का यही चेहरा होता है -छल-छद्म और वोट बैंक संयोजन. अब घड़ियाली आंसू बहाकर भी रघुबर दास और भाजपा को कुछ हासिल नहीं होने जा रहा. देख लीजियेगा आप, वर्तमान हेमंत सरकार इन सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन से निबटने के साथ-साथ रघुबर दास की सियासी लाभोत्सुक संवेदना का भी तिया- पांच कर देगी.

    मैंने कहा- ये मामला सुलगा और झारखंड मुक्ति मोर्चा में उपचुनाव व अन्य कारणों से असंतोष पनपा तो पुनः भाजपा सरकार की वापसी हो जायेगी.

    वे बोले – जड़ विहीन ठूंठ में कोंपल की बात करते हैं आप.
    मुन्ना बाबू, वर्तमान हालात को समझिये. पूरे झारखंड समेत संथाल परगना के दूर-देहात में भाजपा की जड़ें स्थापित कर उन्हें सींचने वाले संघ – संगठन के कार्यकर्ताओं को अपने राजकाल में तिरस्कृत करते रहे रघुबर दास जी की सक्रियता घावों को कुरेदने के अलावा कुछ नहीं करेगी.
    एक तो बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी देर से हुई और वापसी के उपरांत भी संगठन में हासिये पर. रुटीन राजनीति से सत्ता संधान नहीं हो सकता. अब तक तो दुमका से बाबूलाल मरांडी की उम्मीदवारी घोषित हो जानी चाहिये थी. बेरमो से गठबंधन सहयोगी आजसू के अन्योन्याश्रित रणनीति का क्रियान्वयन भी जमीन पर दिखाई देना चाहिये था. किन्तु हो क्या रहा है भाजपा प्रदेश संगठन में? गुटबन्दी से सियासी ज़मीन उर्वर नहीं होती.

    वे आगे बोलते रहे- हेमंत सोरेन के दुमका दौरे और अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन देखकर मुझे तो तय जान पड़ता है कि उपचुनाव में भी झामुमो गठबंधन बाजी मारेगा.

    बात आई-गई और हमलोग अन्य विषयों पर वार्तालाप करते आगे बढ़ते रहे. शाम के वक़्त मैंने उन्हें व्हाट्सएप समाचार में जारी विडियो दिखाते हुये कहा- देखिये महाराज, पुलिस बनाम पुलिस हो गया. भारी पड़ेगा हेमंत सोरेन सरकार को सहायक पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज.

    निर्विकार भाव से उन्होंने कहा- प्रशासन ने कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन कर आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को शासन के इकबाल का अहसास मात्र कराया है. आप निश्चिंत रहिये और देखियेगा सरकार संवाद से इस समस्या का समाधान सुनिश्चित कर लेगी.

    उन्होंने कहा – मुन्ना बाबू रोजगार को लेकर लोग बीजेपी से नाराज़ हैं, झारखंड मुक्ति मोर्चा से नहीं. ज़मीनी मुद्दों को आप दरकिनार नहीं कर सकते. केन्द्रीय जनादेश इस मुद्दे पर भी लिया गया था कि सालाना 2 करोड़ युवाओं को नौकरी मिलेगी. उस वक्त केन्द्र में मोदी और झारखंड में रघुबर दास की सरकार थी.
    प्रदेश भाजपा सोशल मीडिया व अन्य संचार माध्यमों पर हेमंत सोरेन सरकार को रोजगार के मुद्दे पर घेरकर अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार रही है.

    झामुमो गठबंधन के झारखंड में सत्ता में आये 8 महीने भर हुये हैं और बेरोजगारी कोरोनाकाल की देन भी नहीं है, ये पहले से है, जो आंकड़ों के मुताबिक पिछले छह साल में बढ़ी है.
    नई नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा और पुरानी नौकरियों का संरक्षण सरकार नहीं कर पा रही है.ये स्थिति सीधे तौर पर केन्द्र और झारखंड में सत्तारूढ़ रही रघुबर सरकार की नाकामी है.

    बगैर किसी योजना के युवक-युवतियों को सहायक पुलिसकर्मी की नौकरी का झुनझुना रघुबर दास सरकार ने थमाया था. सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन से यही उजागर हो गया कि रोजगार को लेकर भाजपा की रघुबर दास सरकार के पास कारगर विज़न नहीं था. युवाओं का विरोध इसी नाकामी के खिलाफ है न कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ.

    हां, ये बात हेमंत सरकार को भी समझनी होगी कि युवाओं के लिये रोजगार सुनिश्चित किये बगैर लंबी पारी मुश्किल है.

    राजनीति अपनी जगह है, लेकिन अनंत काल तक दोषारोपण के सहारे युवाओं को बिना नौकरी, बिना रोजगार उलझा नहीं सकते.

    समस्याएं सामने हों तो आंखें बंद करने से न तो भाग सकती हैं, न उनका हल निकल सकता है, उनसे जूझना हेमंत सोरेन सरकार को ही होगा.

    वर्तमान सरकार में लंबित नौकरियों को लेकर सुगबुगाहट हुई भी है, देखिए आगे क्या होता है.

    इतना तय मान लीजिये की पुरानी सूप पीटकर सिर्फ दरिद्रता भगाई जाती है उसके बाद नये सूप से समृद्धि और विकास की नई कहानी लिखी जाती है…

  • रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर होगा भारत, एमएसएमई होंगे बड़े प्लेयर : पोद्दार

    राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर सरकार ने दी जानकारी 

    उज्ज्वल दुनिया /रांची : हिन्दुस्तान जल्दी ही रक्षा उपकरणों के निर्माण में न सिर्फ आत्मनिर्भर होगा बल्कि जल्दी ही दुनिया का बड़ा निर्यातक देश बनेगा| ख़ास बात यह है कि रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण में छोटे व मध्यम उद्यम को भी पर्याप्त मौके मिल रहे हैं| इससे देश की सामरिक ताकत बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और एमएसएमई सेक्टर का विकास होगा| राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने यह जानकारी दी|

    मंत्री श्री नाईक ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक-इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अन्तर्गत रक्षा मंत्रालय ने 101 मदों की सूची तैयार की है, जिनके आयात पर एक तय समयसीमा में प्रतिबन्ध लगा दिया जायेगा| इस सूची में तोपखाना, बंदूकें, असाल्ट राइफल,लड़ाकू जलपोत, सोनार प्रणाली,परिवहन विमान,हल्के युद्धक हेलीकाप्टर (एलसीएच), रडार आदि शामिल हैं| 

    रक्षा उद्योग क्षेत्र, जो अब तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित था, को 26 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ भारतीय निजी क्षेत्र की शतप्रतिशत भागीदारी हेतु खोल दिया गया है| इसके अलावा, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में विभिन्न रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए 44 एफडीआई/संयुक्त उपक्रम स्वीकृत किये गये हैं।

    प्रतिवर्ष विकास लागत 3 करोड़ रुपये और खरीद लागत 50 करोड़ रुपये से कम के मेक-॥ परियोजनाओं को एमएसएमई के लिए आरक्षित किया गया है। एमएसएमई को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में लाने और उसके जरिये रक्षा उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही रक्षा निर्यात बाजार में योगदान के लिए एमएसएमई को बढ़ावा देने की योजना के तहत उद्योग संघों को देश के विभिन्न हिस्सों में सेमिनार आयोजित करने के लिए धन दिया जाता है।